Bihar Teacher News: नहीं रुकेगा बिहार के सरकारी शिक्षकों का ट्रांसफर, 80,000 शिक्षकों का हो चुका है तबादला - एस. सिद्धार्थ
शिक्षकों के लिए राहत, प्राथमिकता आधारित तबादले जारी, जनवरी 2026 तक प्रक्रिया पूरी होगी।

Bihar Teacher News: बिहार में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को लेकर बड़ी खबर आई है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) एस. सिद्धार्थ ने साफ किया है कि शिक्षकों के ट्रांसफर पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने शिक्षकों से घबराने की जरूरत नहीं बताते हुए कहा कि अब तक 80,000 से ज्यादा शिक्षकों का स्थानांतरण हो चुका है, और ज्यादातर ने नए स्कूलों में जॉइन भी कर लिया है। यह खबर बिहार के शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए राहत की बात है।
तबादला प्रक्रिया जारी रहेगी
एस. सिद्धार्थ ने बताया कि शिक्षकों के तबादले एक व्यवस्थित तरीके से किए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया पारदर्शी है और किसी भी शिक्षक के साथ भेदभाव नहीं हो रहा। उन्होंने कहा, “शिक्षकों को घबराने की जरूरत नहीं है। हम सॉफ्टवेयर की मदद से ट्रांसफर कर रहे हैं, ताकि सब कुछ सही और तेजी से हो।” यह प्रक्रिया बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए शुरू की गई है।
प्राथमिकता के आधार पर तबादला
शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण के लिए कुछ खास श्रेणियां बनाई हैं। गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, पति-पत्नी की पोस्टिंग और घर से दूरी जैसे कारणों को प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक 33,000 से ज्यादा शिक्षकों ने इन आधारों पर ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था, जिसमें से ज्यादातर का तबादला पूरा हो चुका है। बाकी शिक्षकों की पोस्टिंग भी जल्द होगी। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि जनवरी 2026 तक सभी तबादले पूरे कर लिए जाएं।
Bihar Teacher News: शिक्षकों की समस्याओं का समाधान
कुछ शिक्षक अपनी नई पोस्टिंग से खुश नहीं थे, जिसके लिए शिक्षा विभाग ने दोबारा आवेदन का मौका दिया था। हालांकि, 8,000 से ज्यादा शिक्षकों ने अपने ट्रांसफर आवेदन वापस ले लिए हैं। विभाग ने साफ किया कि जो शिक्षक नए स्कूल में जॉइन नहीं करेंगे, वे एक साल तक दोबारा ट्रांसफर के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया को और व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
बिहार में शिक्षा सुधार की कोशिश
नीतीश सरकार शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। हाल ही में 1.84 लाख नियोजित शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा के बाद सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया गया। ट्रांसफर नीति से स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और बच्चों को बेहतर पढ़ाई मिलेगी। शिक्षक समुदाय ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन वे चाहते हैं कि प्रक्रिया और तेज हो।