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नियम के विरुद्ध बरबीघा में भाजपा नेता को दिया गया कोविड-19 का टीका

इस बारे में कोई कुछ भी बोलने को नहीं है तैयार

शेखपुरा जिले के बरबीघा रेफरल अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा कोविड-19 वैक्सीनेशन में नियमों को ताक पर रखकर मुंह देखा कार्य किया जा रहा है। नियमानुसार 45 वर्ष से ऊपर के उम्र के लोगों को ही कोविड-19 टीका देना है। लेकिन 21 अप्रैल को सभी नियम कानून को ताक पर रखकर भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रामानुज सिंह उर्फ हीरालाल सिंह को मात्र 41 वर्ष की उम्र में ही कोविड-19 का डोज दे दिया गया। जबकि कुछ दिन पूर्व सिविल सर्जन से बात कर कोविड-19 का टीका लेने गए दो मीडिया कर्मियों को स्वास्थ्य कर्मी अमन कुमार ने यह कहकर लौटा दिया कि 45 वर्ष से कम उम्र के लोगों को टीका नहीं दिया जाता है। ऐसे में 41 साल की उम्र में भाजपा जिला उपाध्यक्ष को किस नियम के तहत कोविड-19 का टीका दिया गया।

हीरालाल सिंह के द्वारा कृषि पंजीकरण में दर्ज जन्मतिथि

इस बारे में एक पत्रकार के द्वारा पूछे जाने पर हीरालाल सिंह ने पहले बात काटते हुए अपने उम्र 48 साल बताई। लेकिन जब उनसे आधार कार्ड की मांग की गई, तो उन्होंने आधार कार्ड देने या दिखाने से मना कर दिया। हालांकि पता करने पर पाया गया कि उनका आधार कार्ड में डेट ऑफ बर्थ 12 अप्रैल 1980 अंकित है। बाद में उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरा डोज लिया है, पहला डोज वह पूर्व में ही ले चुके हैं। वहीं इस मामले में अस्पताल के एक कर्मी से पूछे जाने पर उन्होंने फ्रंटलाइन वर्कर होने के कारण कोविड-19 का टीका देने की बात बताई। अब सवाल ये उठता है कि फ्रंटलाइन वर्कर की परिभाषा क्या है? क्या पत्रकार फ्रंटलाइन वर्कर्स नहीं है? सिर्फ नेता ही फ्रंटलाइन वर्कर हैं? इस मामले पर वर्तमान सिविल सर्जन डॉ कृष्ण मुरारी प्रसाद सिंह से भी जानकारी जुटाने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं होने के कारण उनसे किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। वहीं रेफरल अस्पताल में टीकाकरण का पोर्टल की निगरानी कर रहे अमन कुमार ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। अब इस मामले में वरीय पदाधिकारी क्या कदम उठाते हैं, ये देखना होगा।

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