
पटना। राजधानी पटना में वाटर मेट्रो को लेकर करीब ₹1,200 करोड़ का खाका तैयार किया गया है। इस योजना के तहत गंगा के किनारे आधुनिक टर्मिनल विकसित करने के साथ शहर के प्रमुख घाटों को जल परिवहन से जोड़ने की तैयारी है। प्रस्ताव में कंगन घाट और पहलवान घाट पर रिवर क्रूज टर्मिनल विकसित करने की बात कही गई है। इससे पटना में सड़क परिवहन के साथ गंगा के रास्ते यात्री आवाजाही का एक नया विकल्प तैयार होगा।
गंगा के 10 घाटों को जोड़ने की योजना
IWAI के दस्तावेज के अनुसार, पटना के लिए संभावित जल परिवहन नेटवर्क में 10 स्थानों की पहचान की गई है। इनमें चेचर घाट, कंगन घाट, गाय घाट, गांधी घाट, दीघा घाट, फक्कर महतो घाट, नारियल घाट, पानापुर, कोनहरा घाट और काली घाट (सोनपुर) शामिल हैं। अंतिम रूट और संचालन व्यवस्था DPR तथा आगे की मंजूरी के आधार पर तय होगी।
908 करोड़ के प्रोजेक्ट से शुरू हुई थी तैयारी
मार्च 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, पटना वाटर मेट्रो के शुरुआती चरण के लिए करीब 908 करोड़ रुपये की परियोजना बताई गई थी। गांधी घाट समेत गंगा किनारे चार्जिंग प्लांट लगाने की तैयारी की जानकारी भी सामने आई थी। प्रस्तावित सेवा में हाइब्रिड मोड की एसी बोट और यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी व रेस्क्यू बोट जैसी सुविधाओं की बात कही गई थी।
नई योजना में टर्मिनल पर भी जोर
अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अब करीब 1,200 करोड़ रुपये की व्यापक योजना पर काम की जाएगी। कंगन घाट और पहलवान घाट पर विश्वस्तरीय रिवर क्रूज टर्मिनल विकसित करने का प्रस्ताव है। दोनों जगह दो-दो एकड़ जमीन IWAI को दिए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। हालांकि यह व्यापक परियोजना शुरुआती 908 करोड़ रुपये वाली योजना से किस तरह जुड़ती है, इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
राष्ट्रीय योजना में पटना को मिली जगह
केंद्र की मई 2026 की घोषणा के मुताबिक पटना, श्रीनगर, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज को वाटर मेट्रो के पहले चरण में रखा गया है। इसके लिए राष्ट्रीय वाटर मेट्रो नीति-2026 का मसौदा भी तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य मौजूदा जलमार्गों का इस्तेमाल कर कम जमीन में आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन विकसित करना है।



