
पटना। बिहार में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के बीच तटबंधों को हुए नुकसान के मामले में सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। जल संसाधन विभाग ने बाढ़ प्रबंधन में लापरवाही के आरोप में सात इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है।
गंडक में आया रिकॉर्ड पानी
दरअसल, सितंबर के आखिरी सप्ताह में नेपाल और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ गया। नेपाल के देवघाट के साथ बिहार के बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में भी नदी का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया। पानी के तेज दबाव के कारण कई जगह तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। जानकारी के मुताबिक, 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच गंडक के तटबंध को करीब 13 जगहों पर नुकसान पहुंचा। इसके बाद विभाग की ओर से संवेदनशील स्थानों पर आकस्मिक कार्य योजना के तहत बचाव और मरम्मत की तैयारी करने के निर्देश दिए गए थे।
जांच में क्या सामने आया?
विभागीय निरीक्षण के दौरान कुछ इंजीनियरों की कार्यशैली पर सवाल उठे। आरोप है कि तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद मौके पर पर्याप्त मैनपावर और जरूरी सामग्री समय पर नहीं पहुंचाई गई। इसके अलावा स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ भी अपेक्षित तालमेल नहीं बनाया गया। कुछ स्थानों पर इंजीनियरों से मौके पर मौजूद रहकर टूटे हिस्से को सुरक्षित करने और कटाव रोकने के लिए काम करने की अपेक्षा थी, लेकिन विभागीय जांच में इस काम में शिथिलता मिलने की बात सामने आई।
इन 7 इंजीनियरों पर गिरी गाज
निलंबित किए गए अधिकारियों में सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, गोपालगंज के कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल, सारण के सहायक अभियंता सुनील कुमार और विनोद कुमार, गोपालगंज के सहायक अभियंता मो. जावेद अंसारी तथा सारण और गोपालगंज के कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार और विकास कुमार शामिल हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ चंपारण तटबंध को हुए नुकसान और उसके बाद की आकस्मिक कार्रवाई में कथित लापरवाही को लेकर विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है।



