
पटना। बिहार में सरकारी जमीन पर दर्ज फर्जी जमाबंदी को हटाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत सरकारी भूमि से जुड़ी संदिग्ध और नियमों के विपरीत दर्ज जमाबंदियों की जांच कर उन्हें रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। अभियान की समयसीमा 31 अक्टूबर तक तय की गई है।
सरकारी जमीन के रिकॉर्ड की होगी जांच
अभियान के दौरान राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि सरकारी जमीन पर किस आधार पर जमाबंदी कायम की गई है। जिन मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनमें संबंधित जमाबंदी को निरस्त की जाएगी।
संदिग्ध जमाबंदियों पर होगी कार्रवाई
जमाबंदी किसी जमीन से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें जमीन के स्वामित्व और उससे जुड़े राजस्व विवरण दर्ज रहते हैं। ऐसे में गलत तरीके से जमाबंदी दर्ज होने पर जमीन के रिकॉर्ड को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। विशेष अभियान के दौरान ऐसे मामलों को चिन्हित कर राजस्व अधिकारियों के स्तर पर रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ऑनलाइन रिकॉर्ड की भी होगी मदद
बिहार में जमीन से जुड़े कई रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हैं। विभाग की डिजिटल व्यवस्था के जरिए लोग अपनी जमीन से संबंधित जमाबंदी और अन्य विवरण देख सकते हैं। इससे रिकॉर्ड की जानकारी हासिल करने और गड़बड़ी की पहचान करने में लोगों को सुविधा मिलती है। सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में रिकॉर्ड की जांच के साथ दस्तावेजों और उपलब्ध राजस्व विवरण का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा।
अभियान से जमीन विवादों पर पड़ेगा असर
सरकारी जमीन की फर्जी जमाबंदी के मामले सामने आने पर लंबे समय तक विवाद चल सकता है। रिकॉर्ड की जांच और गलत प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया पूरी होने से सरकारी भूमि से जुड़े रिकॉर्ड को स्पष्ट करने में मदद मिलेगी। हालांकि, किसी जमाबंदी को रद्द करने की कार्रवाई संबंधित मामले की जांच और लागू नियमों के आधार पर ही की जाएगी। केवल किसी रिकॉर्ड के संदिग्ध होने के आधार पर उसे स्वतः फर्जी नहीं माना जा सकता।
31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस विशेष अभियान के लिए 31 अक्टूबर तक की समयसीमा तय की है। इस दौरान सरकारी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच और आवश्यक कार्रवाई पर फोकस रहेगा।



