
पटना। पटना में घर, दुकान, क्लिनिक या ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल हो रही संपत्तियों को लेकर नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। आवासीय इलाकों में गैर-आवासीय इस्तेमाल की पहचान के लिए कराए गए सर्वे के बाद 27,395 संपत्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं। अब संबंधित लोगों को सुनवाई के दौरान अपने जमीन, भवन, नक्शे और जरूरी अनुमति से जुड़े दस्तावेज पेश करने होंगे।
24 आवासीय कॉलोनियां निगरानी में
पटना नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में पूरे निगम क्षेत्र में वार्डवार सर्वे कराया है। इस दौरान आवासीय इलाकों में गैर-आवासीय गतिविधियों की पहचान की गई। इसके बाद संबंधित संपत्ति मालिकों, भू-स्वामियों और उपयोगकर्ताओं को नोटिस देकर उनका पक्ष जानने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस मामले में पटना की 24 प्रमुख आवासीय कॉलोनियां भी निगरानी में हैं। इनमें बिहार सरकार की राजवंशी नगर, शास्त्री नगर, गर्दनीबाग, श्रीकृष्ण पुरी, पाटलिपुत्र कॉलोनी, कंकड़बाग, बहादुरपुर, राजेंद्र नगर, हनुमान नगर, छज्जूबाग और CDA कॉलोनी जैसी कॉलोनियां शामिल हैं।
इसके अलावा P&T कॉलोनी, Revenue Colony और RBI Colony केंद्र सरकार की कॉलोनियों में शामिल हैं। निजी कॉलोनियों में आशियाना नगर, कृषि नगर, पुलिस कॉलोनी, BM कॉलोनी, AG कॉलोनी, राजीव नगर, बुद्धा कॉलोनी, श्रीकृष्ण नगर IAS कॉलोनी, आनंदपुरी और MMA फ्लैट कॉलोनी का नाम सामने आया है।
27,395 संपत्तियों को नोटिस
नगर निगम की कार्रवाई के तहत 27,395 संपत्तिधारकों को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित मकान या परिसर को तुरंत सील कर दिया जाएगा। नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई में अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। उनसे जमीन के स्वामित्व से जुड़े कागजात, स्वीकृत भवन नक्शा, अधिभोग प्रमाण-पत्र और गैर-आवासीय इस्तेमाल की अनुमति या अनापत्ति से संबंधित दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
समाधान के लिए बनी पांच सदस्यीय समिति
मामले को लेकर राज्य सरकार ने भी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 25 अगस्त 2026 को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश कुमार मिश्र को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और विधान पार्षद संजय कुमार सिंह को समिति में सदस्य बनाया गया है। समिति का उद्देश्य पूरे मामले का अध्ययन कर व्यावहारिक और जनहित से जुड़े समाधान की दिशा में काम करना है।
फिलहाल नगर निगम की सुनवाई और दस्तावेजों की जांच इस पूरे मामले में अहम है। ऐसे में घर के साथ दुकान, क्लिनिक, ऑफिस या अन्य कारोबार चलाने वाले लोगों को अपने जमीन, भवन, नक्शे और अनुमति से जुड़े कागजात तैयार रखने चाहिए। आगे की कार्रवाई प्रत्येक संपत्ति के दस्तावेज और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।



