राजनीतिशेखपुरा

पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी की 30वीं पुण्यतिथि पर कांग्रेसियों ने दी श्रद्धांजलि

देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी की आज 30वीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुंदर साहनी के द्वारा लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही गरीबों के बीच मास्क का भी वितरण किया गया। वहीं दूसरी तरफ बरबीघा के श्री कृष्ण आश्रम में भी वरिष्ठ कांग्रेसी अजय कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भी उनके तैल-चित्र पर माल्यार्पण किया।

उनके जीवन की छोटी सी झलक
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बड़े पुत्र राजीव गांधी की राजनीति में कोई रूचि नहीं थी और वो एक एयरलाइन पाइलट की नौकरी करते थे। परंतु 1980 में अपने छोटे भाई संजय गांधी की एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद अपनी माता इन्दिरा गांधी को सहयोग देने के लिए सन् 1981 में राजीव गांधी ने राजनीति में प्रवेश लिया। वो पहली बार उत्तरप्रदेश के अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीत कर सांसद बने और 31 अक्टूबर 1984 को अंगरक्षकों द्वारा प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या किए जाने के बाद वो भारत के प्रधानमंत्री बने। उसके अगले आम चुनाव में सबसे अधिक बहुमत पाकर वो फिर से प्रधानमंत्री बने।
देश में सूचना क्रांति के जनक थे राहुल गांधी
राजीव गांधी को भारत में सूचना क्रांति के जनक के तौर पर भी जाना जाता है। देश के कंप्यूटराइजेशन और टेलीकम्युनिकेशन क्रांति का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में महिलाओं को 33% रिजर्वेशन दिलवाने की बात हो अथवा मतदाता की उम्र 21 वर्ष से कम करके 18 वर्ष तक के युवाओं को चुनाव में वोट देने का अधिकार सबका श्रेय राजीव गांधी को ही जाता है। चुनावों का प्रचार करते हुए 21 मई, 1991 को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (लिट्टे)नामक आतंकवादी संगठन के आतंकवादियों ने राजीव गांधी की एक बम विस्फ़ोट में हत्या कर दी। हालांकि देश के सबसे चर्चित बोफोर्स घोटाले में उनका नाम उछला था। लेकिन बाद में उनकी मौत के बाद फ़ाइल से उनका नाम हटा दिया गया था।

 

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