Jharkhand News: धनबाद में फर्जी दस्तावेज से 10 करोड़ की सरकारी जमीन बेची गई, एफआईआर दर्ज, अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी
झारखंड में सरकारी जमीन की फर्जी खरीद-बिक्री, जांच तेज, आरोपियों पर कार्रवाई होगी

Jharkhand News: झारखंड के धनबाद में एक बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है। फर्जी कागज बनाकर 10 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन बेच दी गई। बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के पीछे भेलाटांड़ मौजा में 4 एकड़ 10 डिसमिल जमीन की फर्जी डीड बनाकर बेची गई। गोविंदपुर सीओ धर्मेंद्र दुबे ने बरवाअड्डा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोपियों में अमरचंद्र गोराई, बलराम गोराई और राजीव रंजन उर्फ रवि यादव शामिल हैं। यह मामला झारखंड में भू माफियाओं की करतूत को उजागर करता है। जांच में पाया गया कि फर्जी दस्तावेजों से सरकारी गैर-आबाद जमीन को बेचा गया। अब अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी है।
जानें घोटाले का पूरा मामला
धनबाद बंदोबस्त कार्यालय से मिली रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मौजा भेलाटाड़, मौजा नंबर 89, खाता 271, प्लॉट संख्या 220 की 4 एकड़ 10 डिसमिल जमीन की फर्जी खरीद-बिक्री हुई। रिपोर्ट में पाया गया कि खाता संख्या 273 मौजूद ही नहीं है, लेकिन फर्जी कागजों में इसे इस्तेमाल किया गया। आरोपी अमरचंद्र गोराई ने भूखंड का निबंधित पावर ऑफ अटर्नी दिया, बलराम गोराई ने पावर ऑफ अटर्नी दिया, और राजीव रंजन ने इसे होल्ड किया। डीसी के आदेश पर गोविंदपुर सीओ ने एफआईआर दर्ज कराई। जमीन की अनुमानित कीमत 10 करोड़ रुपये है। यह घोटाला सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान पहुंचाता है।
आरोपियों और जांच की स्थिति
एफआईआर में भारतीय मुद्रांक अधिनियम और लोक मांग वसूली अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। जांच में पाया गया कि फर्जी डीड बनाकर जमीन बेची गई। अपर समाहर्ता विनोद कुमार ने गोविंदपुर सीओ को तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी है। इसमें दाखिल खारिज, जमाबंदी और भू स्वामित्व प्रमाणपत्र देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को चिह्नित किया जाएगा। पूर्व अवर निबंधक समेत कई अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। एक अधिकारी रांची जाकर मामले को मैनेज करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हुआ।
Jharkhand News: सरकार की कार्रवाई और असर
यह घोटाला झारखंड में भू माफियाओं की सक्रियता दिखाता है। सरकार अब सख्त कदम उठा रही है। एफआईआर के बाद कुर्की-जब्ती की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। लोग कहते हैं कि ऐसी घटनाओं से सरकारी जमीन सुरक्षित रखना जरूरी है। यह मामला धनबाद के लोगों में चर्चा का विषय बन गया है। उम्मीद है कि जांच से दोषी पकड़े जाएंगे और राजस्व की हिफाजत होगी।