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Malegaon Blast Case: मालेगांव ब्लास्ट केस, रेणुका चौधरी का बयान ,हिंदू भी हो सकता है आतंकवादी"

एनआईए कोर्ट ने मालेगांव ब्लास्ट केस में 7 आरोपियों को बरी किया, रेणुका चौधरी का हिंदू आतंकवाद बयान विवादित।

Malegaon Blast Case: मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने 29 सितंबर 2008 को हुए मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। इस धमाके में 6 लोगों की मृत्यु हुई थी और 95 लोग घायल हुए थे। न्यायालय ने पूर्व बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश एके लाहोटी ने कहा कि अभियोजन पक्ष इस मामले में पुख्ता सबूत प्रस्तुत करने में विफल रहा।

अदालत ने पाया कि जिस मोटरसाइकिल पर बम रखा गया था, उसका चेसिस नंबर साफ नहीं था और यह साबित नहीं हो सका कि वह मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर की थी। इसके अलावा, जांच में कई खामियां थीं, जैसे कि घटनास्थल का स्केच नहीं बनाया गया और नमूने दूषित होने के कारण सबूत विश्वसनीय नहीं थे।

Malegaon Blast Case: रेणुका चौधरी का विवादित बयान

इस फैसले के बाद कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने एक बयान दिया, जिसने विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा, “हिंदू भी आतंकवादी हो सकता है। यह बयान मालेगांव ब्लास्ट केस के फैसले के संदर्भ में दिया गया, जिसने देश में ‘हिंदू आतंकवाद’ की बहस को फिर से हवा दे दी। रेणुका चौधरी का यह बयान बीजेपी नेताओं को पसंद नहीं आया। बीजेपी सांसद रवि किशन ने कहा कि कांग्रेस ने ‘भगवा आतंकवाद’ का जुमला गढ़कर 100 करोड़ हिंदुओं का अपमान किया है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

बीजेपी का पलटवार और मुआवजे की घोषणा

बीजेपी नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे ‘न्याय की जीत’ बताया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा आतंकवाद कभी भगवा नहीं था, नहीं है और न होगा। न्यायालय ने पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे।

17 साल पुराना मामला

मालेगांव ब्लास्ट 2008 में रमजान के महीने में हुआ था, जब एक मोटरसाइकिल पर रखा बम फटा था। इस मामले की जांच पहले महाराष्ट्र एटीएस ने की थी, जिसने हिंदू चरमपंथियों पर आरोप लगाया था। बाद में 2011 में यह केस एनआईए को सौंप दिया गया। इस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब सभी आरोपी बरी हो चुके हैं, लेकिन यह मामला अभी भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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