
पटना: बिहार में पंचायतों को सिर्फ सरकारी फंड पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में काम करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि गरीब परिवारों पर टैक्स का बोझ नहीं डाला जाएगा, लेकिन गांवों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को राजस्व जरूर मिलना चाहिए। उनका जोर पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर रहा।
पटना के होटल ताज में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, व्यावसायिक गतिविधियां और मोबाइल टावर जैसी कई ऐसी गतिविधियां चलती हैं, जिनसे पंचायतों को राजस्व मिल सकता है। इससे पंचायतों के पास स्थानीय स्तर पर विकास कार्य कराने के लिए अतिरिक्त पैसा उपलब्ध हो सकेगा।
गरीबों पर टैक्स नहीं, कारोबार से राजस्व
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि पंचायतों की आय बढ़ाने का मतलब गरीब परिवारों पर नया कर लगाना नहीं है। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं, वहां से नियमानुसार पंचायतों को टैक्स या राजस्व मिलना चाहिए। इस व्यवस्था का मकसद पंचायतों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। अगर स्थानीय निकाय के पास अपनी आय का स्रोत होगा तो छोटे-बड़े विकास कार्यों के लिए केवल सरकारी अनुदान पर निर्भरता कम हो सकती है।
पंचायत के कामकाज का जनता को मिले हिसाब
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पंचायत के मुखिया, प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद को अपनी पंचायत के विकास का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने इसके लिए पंचायत की ‘जीडीपी’ का जिक्र किया। आसान भाषा में समझें तो पंचायत में कितनी आर्थिक गतिविधियां हो रही हैं, कितना विकास हुआ और स्थानीय स्तर पर कितने संसाधन जुटाए जा रहे हैं, इसकी जानकारी लोगों के सामने रखने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री, राज्य में मुख्यमंत्री और जिले में डीएम को सबसे ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन पंचायत स्तर पर मुखिया के पास भी काफी जिम्मेदारियां होती हैं। इसलिए पंचायत प्रतिनिधियों को अपने काम के प्रति जवाबदेह होना जरूरी है।
7,500 की आबादी पर पंचायत का मुद्दा
सम्राट चौधरी ने पंचायतों के परिसीमन को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि नियमानुसार करीब 7,500 की आबादी पर एक पंचायत होनी चाहिए। लेकिन राज्य में कुछ ऐसी पंचायतें भी हैं, जहां आबादी 20 हजार तक पहुंच गई है और कई गांव एक ही पंचायत में शामिल हैं। इसी को देखते हुए पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है। राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 के पंचायत परिसीमन से संबंधित दस्तावेज और आदेश भी उपलब्ध हैं। आयोग की प्रक्रिया में जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक सीमाओं जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।
नए परिसीमन से पंचायत चुनाव की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पंचायत चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराने की दिशा में तैयारी की जा रही है। यानी जिन पंचायतों की सीमाओं में बदलाव होगा, उसका असर आने वाले चुनाव पर भी पड़ सकता है। उन्होंने गांवों को बार-बार नगर निकायों में शामिल किए जाने के मुद्दे पर भी चिंता जताई। मुख्यमंत्री के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों को नगर निकाय में शामिल करने से वहां चल रहे विकास कार्यों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।



