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बिहार में मशरूम की खेती का बढ़ता कारोबार, 11 साल में उत्पादन 0.06 से बढ़कर 42.19 हजार टन

पटना। Bihar Mushroom Farming: बिहार में मशरूम की खेती अब किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए कमाई का नया जरिया बन रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में मशरूम उत्पादन वर्ष 2013-14 के 0.06 हजार टन से बढ़कर 42.19 हजार टन तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि मशरूम की खेती कम जगह में भी की जा सकती है, जिससे छोटे किसानों और कम आय वाले परिवारों को रोजगार का अवसर मिल रहा है।

मशरूम उत्पादन में बिहार की बड़ी बढ़ोतरी

बिहार में पिछले 11 वर्षों के दौरान मशरूम उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में राज्य मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बना था। इसके बाद से भी इस क्षेत्र में बिहार की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। मखाना के लिए प्रसिद्ध बिहार अब मशरूम उत्पादन के कारण भी कृषि क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है।

कम जगह में शुरू हो सकती है खेती

मशरूम उगाने के लिए बड़े खेत की आवश्यकता नहीं होती। किसान कमरे, झोपड़ी या शेड में रैक लगाकर भी इसकी खेती कर सकते हैं। इसके लिए भूसा, कंपोस्ट और स्पॉन जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इस खेती में तापमान, नमी और साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। सही प्रशिक्षण और तकनीक के बिना उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

महिलाओं और युवाओं को रोजगार का मौका

मशरूम की खेती ग्रामीण महिलाओं, युवाओं और छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है। इसे सीमित जगह में शुरू करने की संभावना होने के कारण कई परिवार इसे छोटे व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं।

मखाना के साथ मशरूम पर भी जोर

बिहार का मखाना पहले से ही देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहा है। मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में जीआई टैग मिला था। दूसरी ओर, मशरूम की खेती कम जगह में उत्पादन की सुविधा के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक अलग अवसर प्रदान करती है।

बाजार अनुमानों के अनुसार, भारत में मशरूम का बाजार वर्ष 2030 तक 24,753 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

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