
बरबीघा/शेखपुरा: बरबीघा-शेखपुरा मुख्य सड़क स्थित चंदेश्वर एंड सन्स पेट्रोल पंप पर कथित लूटपाट और मारपीट के मामले में नया मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य आरोपी प्रवीण कुमार ने पेट्रोल पंप संचालक की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत और मनगढ़ंत बताते हुए दावा किया है कि पूरा विवाद पुराने पैसे के लेन-देन से जुड़ा हुआ है।
पिछले दिनों चंदेश्वर पेट्रोल पंप पर लूटपाट और मारपीट की सूचना पुलिस को दी गई थी। सूचना मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार, तकनीकी शाखा प्रभारी अवधेश कुमार और थानाध्यक्ष गौरव कुमार मौके पर पहुंचे तथा मामले की जांच शुरू की।
थानाध्यक्ष गौरव कुमार के अनुसार, प्रारंभिक जांच में विवाद की वजह पैसे का लेन-देन सामने आया है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पेट्रोल पंप संचालक ने लगाए थे गंभीर आरोप
पेट्रोल पंप के संचालक और बरबीघा प्रखंड के तोयगढ़ गांव निवासी पप्पू सिंह ने मीडिया को दिए बयान में आरोप लगाया था कि प्रवीण कुमार अपने सहयोगियों के साथ पेट्रोल पंप पर पहुंचे और वहां लूटपाट की।
उन्होंने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की। घटना पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थी, लेकिन आरोपी सीसीटीवी का डीवीआर भी अपने साथ लेकर चले गए।
आरोपी पक्ष ने कहा—पप्पू सिंह पर ₹65 लाख बकाया
अब आरोपी पक्ष की ओर से भी पूरे मामले पर सफाई दी गई है। मगही न्यूज़ से दूरभाष पर बातचीत में प्रवीण कुमार ने दावा किया कि पप्पू सिंह के साथ उनका पुराना आर्थिक लेन-देन है और उनके पास करीब ₹65 लाख बकाया है।
प्रवीण कुमार के अनुसार, बकाया राशि मांगने पर काफी समय से टालमटोल की जा रही थी। घटना वाले दिन पप्पू सिंह ने स्वयं ₹1 लाख देने के लिए उन्हें पेट्रोल पंप पर बुलाया था।
प्रवीण ने दावा किया, “मैं अपने एक दोस्त के साथ पेट्रोल पंप पर पहुंचा था। वहां मौजूद लोगों ने हमारे साथ गाली-गलौज और बदतमीजी शुरू कर दी। इसके बाद मारपीट की गई। हमलोग किसी तरह जान बचाकर वहां से निकले।”
उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में साजिश के तहत उल्टे उनके खिलाफ ही मामला दर्ज करा दिया गया।
डीवीआर गायब करने के आरोप से किया इनकार
सीसीटीवी का डीवीआर लेकर जाने के आरोप को भी प्रवीण कुमार ने गलत बताया। उन्होंने आशंका जताई कि उन्हें फंसाने के उद्देश्य से दूसरे पक्ष ने खुद ही डीवीआर गायब किया हो सकता है। हालांकि आरोपी पक्ष के इन दावों और ₹65 लाख के कथित लेन-देन की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पेट्रोल पंप संचालक जहां इसे लूटपाट और मारपीट की घटना बता रहे हैं, वहीं आरोपी पक्ष इसे पुराने आर्थिक लेन-देन से जुड़ा विवाद बता रहा है।
अब पुलिस की जांच में उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान, सीसीटीवी डीवीआर की स्थिति और कथित आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविकता क्या है और दोनों पक्षों के दावों में कितनी सच्चाई है। खबर में दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों को शामिल किया गया है। मामले की अंतिम सच्चाई पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।



