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कोरोना पर भारी पड़ी आम लोगों की मजबूरी, बाजारों में यूं ही नहीं लगती है भीड़

(व्यंग्यात्मक खबर)
पूरे बिहार में लॉक डाउन लगा है। इस लॉक डाउन का शेखपुरा जिले में कोई असर होता नहीं दिख रहा है। यहां बाजारों में 80% दुकानें खुली हुई हैं। बरबीघा बाजार का तो हाल कुछ ज्यादा ही खराब है। यहां कपड़ा, रेडीमेड, ज्वेलर्स, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित सभी दुकानें, जिन्हें राज्य सरकार ने बंद करने का निर्देश दिया था, बेरोक-टोक खुल रही हैं। ऐसा नहीं है कि जिला प्रशासन ने इन्हें बन्द नहीं करवाया है या इसके लिए व्यवस्था नहीं किया है। पुलिस और प्रशासन के लोग बाजार में लगातार पसीना बहा रहे हैं। बाबजुद इसके बाजारों में भीड़ कमने का नाम नहीं ले रही है।

इसका कारण है शादियों का ये मौसम। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद इसके लिये अपील भी किया है। शादियों के इस मौसम में जिनकी शादियां तय है, वो इसे किसी भी कीमत पर टालना नहीं चाहते। इस संबन्ध में बाजार में कपड़ों की खरीदारी करने आये एक शख्स ने बताया कि शादी के लिये जेवर, टेंट, पंडाल, DJ, बारात जाने की गाड़ी, हलुआई सहित अन्य जरूरतों के लिये एडवांस बुकिंग होती है। शादी टालने पर एडवांस का रुपया बापस करने को कोई तैयार नही होता। ऐसे में लोगों को मजबूरन तय तारीख पर ही काम करना पड़ता है। अब घर में शादी है तो अपने और रिश्तेदारों के कपड़े और अन्य सामग्री के लिये बाजार आना पड़ता है। 4 घण्टे में ही सारी सामग्री खरीदनी होती है। ऐसे में घर के कुछ और सदस्य भी साथ में आते हैं।

मजबूरी में खुली दुकानें

उसके बाद रोजमर्रा की खरीददारी वाले ग्राहक भी बाजार आते हैं। इनमें से 25% लोग शौकिया भी बाजार घूमने आ जाते हैं। अब ऐसे में बाजार में भीड़ लग जाती है तो ये किसकी गलती है। ग्राहक आएंगे तो दुकानदार अपनी दुकान खोलेंगे ही, नहीं तो ये ग्राहक कहाँ जाएंगे। पुलिस-प्रशासन के लोग बाजार में घूमकर दुकानें बन्द करवाते हैं। यहाँ से लुका-छिपी का खेल शुरू होता है। कुछ पीत पत्रकार भी बाजार का वीडियो बनाकर ले जाते हैं, उसे वायरल करते हैं। मजबूरी के इस दौर में बाजारों में लगी इस भीड़ में कोरोना को बाजार में घुसने की जगह मिलेगी तभी तो वो आएगा न।

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