
पटना। बिहार में हर परिवार तक पाइप के जरिए साफ पेयजल पहुंचाने के लिए चल रही हर घर नल का जल योजना को राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को घर पर ही नल से पानी उपलब्ध कराना और पीने के पानी के लिए हैंडपंप व दूसरे स्रोतों पर निर्भरता कम करना है। बिहार विकास मिशन के अनुसार इस निश्चय के तहत राज्य के करीब 2 करोड़ परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
1.12 लाख से ज्यादा वार्डों में योजना का दावा
सरकार की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के कुल 1,14,651 वार्डों में से 1,12,505 वार्डों में हर घर नल का जल योजना कार्यरत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में योजना को अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से लागू किया गया है। बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार गैर-गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों की 4,291 ग्राम पंचायतों के सभी वार्डों में पाइप से पानी पहुंचाने की योजना बनाई गई। इसमें 58,107 वार्डों का लक्ष्य था, जिसमें 57,995 वार्डों में काम शुरू और 57,603 वार्डों में काम पूरा हो गया है। इस श्रेणी में 88.12 लाख घरों को कवर किया गया था, जबकि लक्ष्य 88.95 लाख घरों का था।
आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन प्रभावित इलाकों पर भी जोर
बिहार के कई इलाकों में भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की समस्या सामने आती रही है। ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग से मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्र निश्चय योजना लागू की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों के 30,272 वार्डों को योजना के तहत कवर करने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें 30,136 वार्डों में काम शुरू होने और 29,335 वार्डों में काम पूरा हुआ है।
शहरों में भी पाइप से पानी पहुंचाने की योजना
हर घर नल का जल केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। शहरी क्षेत्रों के लिए भी मुख्यमंत्री शहरी पेयजल निश्चय योजना चलाई गई है। सरकारी आंकड़ों में 19,08,164 शहरी परिवारों का सर्वेक्षण आधार बताया गया था। इनमें से 15.85 लाख परिवारों को योजना के तहत कवर करने का लक्ष्य रखा गया था और उपलब्ध आंकड़े में 14.03 लाख परिवारों के कवर होने की जानकारी है।



