केप टाउन में 69वें CPA सम्मेलन में बोले डॉ. प्रेम कुमार, जलवायु न्याय और जलवायु वित्त पर दिया जोर
बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने कहा- जलवायु परिवर्तन पूरी मानवता के लिए साझा संकट, संसदों को मिलकर बढ़ानी होगी भूमिका

पटना। दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) सम्मेलन में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भारत का पक्ष रखा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जलवायु न्याय, जलवायु वित्त और सभी देशों की साझा भागीदारी पर जोर दिया।
‘जलवायु अनुकूलन और लचीलापन बढ़ाने में संसदीय नेतृत्व की भूमिका’ विषय पर बोलते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब किसी एक देश की समस्या नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने सूखा, बाढ़, चक्रवात, बढ़ते तापमान और पानी तथा खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र किया।
जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रही बड़ी आबादी
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी मानवता से जुड़ा संकट है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की करीब 3.6 अरब आबादी सूखा, बाढ़, चक्रवात, बढ़ते तापमान और जल एवं खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याओं से प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि आपदा आने के बाद राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय जोखिम का पहले से आकलन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना जरूरी है।
भारत ने जलवायु अनुकूलन को विकास से जोड़ा
बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देशों के सामने आर्थिक विकास को तेज करने के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की दोहरी चुनौती है। उन्होंने भारत की प्रकृति के साथ संतुलन और सह-अस्तित्व की परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत ने 2023 में पेरिस समझौते के तहत अपना पहला Adaptation Communication प्रस्तुत किया था। इसके जरिए जलवायु अनुकूलन को देश के विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
भारत की कई पर्यावरणीय पहलों का किया उल्लेख
डॉ. प्रेम कुमार ने भारत में चल रही विभिन्न जलवायु और पर्यावरणीय पहलों की जानकारी दी। इनमें इंटरनेशनल सोलर एलायंस, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI), नमामि गंगे, MISHTI, आर्द्रभूमि संरक्षण, National Clean Air Programme और मिशन LiFE प्रमुख हैं।
उन्होंने सम्मेलन में बताया कि फरवरी 2026 तक भारत की कुल बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी 52.57 प्रतिशत थी और कुल क्षमता 520.51 गीगावाट तक पहुंच चुकी थी।
बिहार की ‘जल-जीवन-हरियाली’ पहल का भी जिक्र
अपने संबोधन में डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार विधानसभा की पर्यावरण संबंधी पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों की मौजूदगी में बिहार विधानसभा के सभी सदस्यों ने लगातार आठ घंटे तक जलवायु और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर चर्चा की थी। इस विमर्श के परिणामस्वरूप ‘जल-जीवन-हरियाली’ जैसी पहल को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
संसदों के लिए रखीं पांच प्रमुख प्राथमिकताएं
डॉ. प्रेम कुमार ने वैश्विक जलवायु कार्रवाई में संसदों की भूमिका को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताएं सामने रखीं।
.विधायी और बजटीय प्रक्रियाओं में जलवायु अनुकूलन को उचित स्थान देना।
.वैज्ञानिक आकलनों को नीति निर्माण का आधार बनाना।
.जलवायु वित्त और तकनीकी हस्तांतरण को आसान बनाना।
राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के बीच ‘क्लाइमेट पार्लियामेंट्री कोऑपरेशन नेटवर्क’ स्थापित करना।
.स्थानीय समुदायों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारीसुनिश्चित करना।
जमैका की संसद की अध्यक्ष ने किया स्वागत
सत्र में जमैका, केन्या, युगांडा और पाकिस्तान समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान जमैका की संसद की अध्यक्ष श्रीमती जूलियट होलनेस ने डॉ. प्रेम कुमार का स्वागत किया। डॉ. प्रेम कुमार ने भी उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।


