बिहार के 6 जिलों में लगेंगी मखाना प्रोसेसिंग यूनिट, किसानों को मिलेगी आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग
अररिया से पूर्णिया तक छह कृषि विज्ञान केंद्रों में छोटी प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर किसानों को मखाना की सफाई, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की ट्रेनिंग दी जाएगी।

पटना। बिहार में मखाना की खेती के साथ अब इसकी प्रोसेसिंग को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। राज्य सरकार छह कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) में सूक्ष्म मखाना प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करेगी। इन इकाइयों का मकसद किसानों को मखाना की आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक से जोड़ना और स्थानीय स्तर पर इससे जुड़े कारोबार को बढ़ावा देना है।
इन छह जिलों में बनेगी यूनिट
सरकार की योजना के तहत अररिया, मधेपुरा, कटिहार, सहरसा, पूर्णिया और सुपौल के कृषि विज्ञान केंद्रों में सूक्ष्म मखाना प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जानी है। इन केंद्रों के जरिए किसानों को सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि फसल की कटाई के बाद होने वाली प्रोसेसिंग की जानकारी भी दी जाएगी। निर्देश के अनुसार इन इकाइयों को चालू वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे मखाना उत्पादन वाले इलाकों में प्रोसेसिंग की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
किसानों को क्या फायदा होगा?
मखाना की प्रोसेसिंग में गुणवत्ता बनाए रखना और नुकसान को कम करना काफी जरूरी है। प्रस्तावित इकाइयों में किसानों को बेहतर प्रोसेसिंग तकनीक, गुणवत्ता बनाए रखने और उत्पाद को बाजार के हिसाब से तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। इसका एक फायदा यह भी हो सकता है कि किसानों और स्थानीय युवाओं को मखाना आधारित छोटे कारोबार शुरू करने के लिए बेहतर आधार मिले। यानी मखाना को केवल कच्चे उत्पाद के रूप में बेचने के बजाय उसकी वैल्यू बढ़ाने पर जोर रहेगा।
बिहार देश में सबसे बड़ा मखाना उत्पादक
मखाना उत्पादन में बिहार की बड़ी हिस्सेदारी है। केंद्र सरकार के अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में बिहार में मखाना का उत्पादन 60,000 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है और औसत उत्पादकता 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। कटिहार, पूर्णिया, मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, अररिया, मधेपुरा और सीतामढ़ी प्रमुख मखाना उत्पादक जिलों में शामिल हैं।
मखाना की पूरी वैल्यू चेन पर जोर
मखाना क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया है। इसके तहत उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। केंद्र की योजना के लिए 476.03 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।



