
पटना। बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए चल रहे जमाबंदी सुधार एवं उत्तराधिकार नामांतरण अभियान को अब पंचायत स्तर पर भी मदद मिलेगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य और पंचों के साथ समन्वय कर मृत जमाबंदी धारकों के वारिसों की पहचान और उनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। यह विशेष अभियान 15 सितंबर से शुरू हुआ है। 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
पंचायत प्रतिनिधि करेंगे लोगों की मदद
अभियान के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों को स्थानीय स्तर पर प्रशासन का सहयोग करने को कहा गया है। खासकर ऐसे मामलों की पहचान की जाएगी, जहां जमाबंदी किसी ऐसे व्यक्ति के नाम पर है जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद उनके कानूनी उत्तराधिकारियों का विवरण जुटाकर नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
हर जमाबंदी की होगी जांच
विभाग ने अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे केवल लोगों के आवेदन का इंतजार न करें। राजस्व कर्मचारी हल्का स्तर पर जाकर जमाबंदी रिकॉर्ड की जांच करेंगे। पुराने अभिलेखों से मिलान कर नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा और लगान जैसी जानकारियों में मौजूद गलतियों को ठीक किया जाएगा।
मृत खातेदारों के वारिसों का नाम होगा दर्ज
जमाबंदी धारक की मृत्यु होने के बाद यदि रिकॉर्ड में अब भी उनका नाम दर्ज है, तो उत्तराधिकारियों का नाम जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। इसके लिए पंचायत सचिव और सरपंच की मदद से परिवार की वंशावली और जरूरी दस्तावेज जुटाए जाएंगे। जहां आपसी बंटवारा नहीं हुआ है, वहां सभी कानूनी वारिसों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
जरूरत पड़ी तो निःशुल्क होगी जमीन की मापी
रिकॉर्ड और जमीन की वास्तविक स्थिति में अंतर मिलने पर विभाग जरूरत के अनुसार जमीन की मापी भी करा सकता है। इसके लिए विशेष सर्वेक्षण अमीनों की सहायता ली जाएगी और अभियान के तहत आवश्यक मापी के लिए रैयत से अलग शुल्क नहीं लिया जाएगा।
31 अक्टूबर तक पूरा करना है अभियान
जमाबंदी सुधार का यह विशेष अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अंचल अधिकारियों को अपने क्षेत्र के रिकॉर्ड की नियमित निगरानी करने और लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने को कहा गया है। विभाग मुख्यालय स्तर से भी अभियान की प्रगति की लगातार समीक्षा कर रहा है।



