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अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की प्रदेश अध्यक्ष की पहल ने प्रशासन की मदद से एक और बाल विवाह रोका

Supaul: बिहार में बाल विवाह आज भी सरकार के लिए एक चुनौती है। तमाम कोशिशों और जागरूकता अभियानों के बाद भी गांवों में बाल विवाह की कई घटनाएं देखने व सुनने को मिल जाती हैं। प्रशासन को जानकारी मिलने पर कार्रवाई भी होती है परंतु कई बार सूचना के अभाव में बेटियों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है। ऐसा ही एक मामला सुपौल जिले के पिपरा खुर्द पंचायत से सामने आया है। जहां एक परिवार अपनी नाबालिग बेटी की शादी कर रहा था। हालांकि मामले की सूचना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मिलने के बाद उसकी जिंदगी को बर्बाद होने से बचा लिया गया।

जानकारी के अनुसार इस शादी की सूचना किसी ग्रामीण ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की प्रदेश अध्यक्ष अंजना सिंह को दे दी। जिसके बाद उन्होंने त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी कृष्णा झा के साथ मौके पर पहुंच गई। जहां उन्होंने पंचायत की मुखिया किरण देवी, स्वच्छता पर्यवेक्षक प्रेमचंद, ग्रामीण अनिल कुमार साह, कपिलेश्वर शर्मा के सहयोग से नाबालिग के घर पहुँचकर शादी को रुकबाया। साथ ही लड़की के परिजनों को समझाया और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने की चेतावनी भी दी।

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की प्रदेश अध्यक्ष को धन्यवाद देते हुए इस पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। उनकी सजगता ने समय रहते एक बाल विवाह को रोक दिया गया।

वहीं अंजना सिंह ने स्थानीय लोगों को समझाते हुए कहा कि बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को जड़ से खत्म किया जा सके। लेकिन इसके लिए आप लोगों को सजग और जागरूक रहना होगा। अगर कोई भी मामला दिखे तो तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। साथ ही अपने आसपास के लोगों की मदद से समझाने का प्रयास करें। बता दें कि अंजना सिंह ने अबतक पूरे बिहार में 26 बाल विवाह को रोककर सराहनीय कार्य किया है।

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