
पटना। बिहार सरकार की बाल हृदय योजना वैसे बच्चों के लिए है जो दिल में छेद के साथ पैदा हुए है। जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य योजना वरदान साबित हुई है। इस योजना के तहत हृदय में छेद समेत जन्मजात हृदय संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को विशेषज्ञ अस्पतालों में फ्री जांच, इलाज और सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
कैसे होती है बच्चों की पहचान?
बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्क्रीनिंग करती हैं। RBSK के जरिए से संदिग्ध बच्चों की जांच के बाद उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास रेफर किया जाता है। हाल के मामलों में जिलों से बच्चों को जांच और आगे के इलाज के लिए बड़े शहरों में रेफर किया गया है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी
बच्चे में दूध पीने में परेशानी, सांस फूलना, उम्र के अनुसार वजन नहीं बढ़ना, बार-बार निमोनिया होना, शरीर का नीला पड़ना या बहुत जल्दी थक जाना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत ही डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं।
बिहार बाल हृदय योजना के लाभ
बिहार बाल हृदय योजना बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को बेहतर और निशुल्क उपचार उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पात्र बच्चों को हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों के इलाज और ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
निशुल्क हृदय उपचार: पीड़ित बच्चों का हृदय रोग से संबंधित इलाज फ्री में कराया जाता है।
निशुल्क सर्जरी: जरूरत पड़ने पर बच्चे की हृदय सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों से इलाज: बच्चों को विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलता है।
दवाइयों की सुविधा: इलाज के दौरान दवाइयों और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था योजना के तहत उपलब्ध कराई जाती है।
दूसरे शहर में इलाज की सुविधा: किसी वजह से बिहार में बेहतर इलाज उपलब्ध नहीं हो ,तो बच्चे को दूसरे शहर के विशेषज्ञ अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जा सकता है।
यात्रा संबंधी सहायता: दूसरे शहर में इलाज के लिए जाने वाले बच्चे और उनके साथ जाने वाले परिजनों के लिए यात्रा का खर्चा भी सरकार देती है।



