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बिहार में महंगा हुआ सुधा दूध: 22 मई से बढ़ीं कीमतें, हर लीटर पर देना होगा ज्यादा पैसा

पटना :बिहार में बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों को एक और बड़ा झटका लगा है। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (COMFED) के लोकप्रिय ब्रांड सुधा डेयरी ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें 22 मई 2026 से लागू हो गई हैं। अब उपभोक्ताओं को हर लीटर दूध खरीदने पर पहले से लगभग 2 रुपये अधिक खर्च करने होंगे।

 

दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब पहले से ही रसोई गैस, सब्जियों, दाल और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ी हुई हैं। ऐसे में इस फैसले का सीधा असर लाखों परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ने वाला है।

 

किन-किन दूध उत्पादों के बढ़े दाम

  • नई कीमतों के अनुसार सुधा डेयरी के कई प्रमुख दूध उत्पाद महंगे हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक:
  • सुधा गोल्ड फुल क्रीम दूध: ₹65 से बढ़कर ₹67 प्रति लीटर
  • सुधा शक्ति दूध: ₹57 से बढ़कर ₹59 प्रति लीटर
  • सुधा काऊ मिल्क: ₹54 से बढ़कर ₹56 प्रति लीटर

 

कंपनी की ओर से कहा गया है कि उत्पादन लागत, पशुचारा, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट खर्च में वृद्धि के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं।

 

क्यों बढ़ानी पड़ी कीमतें?

दूध कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में डेयरी उद्योग की लागत लगातार बढ़ी है। पशुओं के चारे, डीजल, बिजली और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे दूध उत्पादन पर पड़ा है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन घट जाता है जबकि मांग बढ़ जाती है। इसके कारण डेयरी कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बनता है। इसी वजह से कई डेयरी ब्रांड कीमतों में संशोधन कर रहे हैं।

 

अमूल और मदर डेयरी पहले ही बढ़ा चुके हैं दाम

सुधा डेयरी से पहले देश की बड़ी डेयरी कंपनियां अमूल और मदर डेयरी भी दूध के दाम बढ़ा चुकी हैं। अमूल ने हाल ही में देशभर में दूध की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। कंपनी ने इसके पीछे ऑपरेशन कॉस्ट, फ्यूल और कैटल फीड महंगा होने को मुख्य वजह बताया था।

 

इसके बाद अब बिहार में सुधा डेयरी द्वारा कीमतें बढ़ाने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

 

घरेलू बजट पर पड़ेगा असर

दूध हर घर की रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल है। बच्चों के पोषण से लेकर चाय, मिठाई, दही और अन्य घरेलू उपयोगों में दूध की खपत होती है। ऐसे में कीमत बढ़ने का असर सीधे मध्यम वर्ग और रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों पर पड़ेगा।

 

विशेष रूप से शहरी इलाकों में रहने वाले परिवार, जहां रोज 2 से 3 लीटर तक दूध की खपत होती है, उन्हें हर महीने अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

 

डेयरी उद्योग की बढ़ती चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डेयरी सेक्टर लगातार लागत दबाव का सामना कर रहा है। पशुओं के चारे की कीमतें, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और ऊर्जा खर्च बढ़ने के कारण कंपनियों को बार-बार कीमतों में बदलाव करना पड़ रहा है।

 

पिछले कुछ वर्षों में सुधा डेयरी कई बार दूध के दाम बढ़ा चुकी है। वर्ष 2023 और 2024 में भी कंपनी ने दूध की कीमतों में 2 से 3 रुपये तक की बढ़ोतरी की थी।

 

उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया

कीमत बढ़ने की खबर सामने आने के बाद उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच दूध जैसे जरूरी उत्पाद के महंगे होने से घर का बजट और प्रभावित होगा।

हालांकि डेयरी कंपनियों का कहना है कि किसानों को उचित भुगतान और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया था।

 

क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में उत्पादन लागत और फ्यूल की कीमतें बढ़ती रहीं, तो अन्य डेयरी उत्पाद जैसे दही, पनीर, घी और मक्खन की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। फिलहाल कंपनियां बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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