
पटना : राजधानी पटना को साफ, स्वच्छ और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। Patna Municipal Corporation शहर के अलग-अलग अंचलों में 6 मॉडर्न गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 69.97 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
नगर निगम का उद्देश्य शहर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक बनाना है, ताकि सड़कों पर खुले में कचरा जमा होने, बदबू फैलने और सफाई व्यवस्था की समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सके।
आधुनिक मशीनों से होगा कचरे का डिस्पोजल
इन मॉडर्न गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों में अत्याधुनिक मशीनों और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। शहर के अलग-अलग इलाकों से कचरा पहले इन स्टेशनों तक लाया जाएगा, जहां मशीनों की मदद से कचरे को कॉम्पैक्ट और प्रोसेस किया जाएगा। इसके बाद उसे अंतिम डिस्पोजल साइट तक भेजा जाएगा।
नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से कचरा उठाव की प्रक्रिया तेज होगी और शहर में गंदगी कम दिखाई देगी। साथ ही ट्रैफिक और भीड़भाड़ वाले इलाकों में कचरा फैलने की समस्या पर भी नियंत्रण मिल सकता है।
किन अंचलों में बनेंगे स्टेशन
जानकारी के अनुसार ये गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन पटना के 6 अंचलों में बनाए जाने हैं:
- अजीमाबाद
- बांकीपुर
- कंकड़बाग
- नूतन राजधानी
- पाटलिपुत्र
- पटना सिटी
फिलहाल बांकीपुर, कंकड़बाग, नूतन राजधानी और पाटलिपुत्र अंचल में प्रस्तावित जमीन चिन्हित कर ली गई है। वहीं अजीमाबाद और पटना सिटी अंचल में अब तक उपयुक्त जमीन नहीं मिल पाई है और जमीन की तलाश जारी है।
किस अंचल में कितना होगा खर्च
परियोजना के तहत अलग-अलग अंचलों में स्टेशन निर्माण पर अलग-अलग लागत आएगी। सबसे अधिक खर्च पटना सिटी अंचल में प्रस्तावित स्टेशन पर किया जाएगा, जहां करीब 13.97 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।
वहीं अन्य अंचलों में भी करोड़ों रुपये की लागत से बड़े स्तर पर निर्माण कार्य किया जाएगा।
शहर की सफाई व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव
नगर निगम का दावा है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद पटना की सफाई व्यवस्था पहले से अधिक व्यवस्थित और आधुनिक हो जाएगी। इससे शहर को “कचरा मुक्त” बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर परियोजना समय पर पूरी हुई और सही तरीके से संचालन किया गया, तो पटना की स्वच्छता रैंकिंग में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह योजना जमीन पर कितनी तेजी से उतरती है और शहरवासियों को इसका फायदा कब तक मिलना शुरू होता है।



