बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष, पीड़ितों से मिले डॉ. प्रेम कुमार, राहत शिविरों का लिया जायजा
विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार पटना के बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया निरीक्षण

पटना: बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बुधवार को पटना जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने दीघा घाट, कुर्जी घाट, जे.पी. गंगा पथ के आसपास के क्षेत्रों और बिंद टोली स्थित राहत शिविरों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। अध्यक्ष ने राहत शिविरों में उपलब्ध भोजन, पेयजल, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने सामूहिक रसोईघर का भी मुआयना किया।
बिंद टोली में 3 हजार और दीघा घाट शिविर में 2500 लोग
डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि बिंद टोली स्थित राहत शिविर में करीब 3,000 लोग, जबकि दीघा घाट के समीप स्थित राहत शिविर में लगभग 2,500 लोग रह रहे हैं। शिविरों में चिकित्सकों, दवाइयों, स्वास्थ्यकर्मियों और एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पशुओं के इलाज और उनके लिए दवाइयों की भी व्यवस्था की गई है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए राहत शिविरों में अस्थायी विद्यालय की व्यवस्था भी की गई है।
त्वचा रोग और वायरल संक्रमण के मरीजों के इलाज की व्यवस्था

निरीक्षण के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वचा संबंधी रोगों और वायरल संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। इनसे निपटने के लिए शिविरों में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है। आवश्यक दवाइयों के साथ एम्बुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
पशु शेल्टर का भी किया निरीक्षण

डॉ. प्रेम कुमार ने राहत शिविरों के साथ पशु शेल्टर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां संरक्षित पशुओं के लिए उपलब्ध चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने पशुओं, विशेषकर गौ माता को चारा खिलाकर उनकी सेवा भी की। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में मानव जीवन के साथ-साथ पशुधन की सुरक्षा और देखभाल को भी प्राथमिकता देना जरूरी है।
राहत व्यवस्था की लगातार निगरानी के निर्देश
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभागों को राहत शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं की लगातार निगरानी करने तथा आवश्यकता के अनुसार तत्काल सुधार सुनिश्चित करने को कहा है।



