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मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना 2026-27: चौर क्षेत्रों में मछली पालन के साथ खेती और बागवानी को बढ़ावा

जलभराव वाली जमीन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी; कृषि, मत्स्य पालन और कृषि वानिकी को एक साथ जोड़ने की पहल

पटना। बिहार सरकार चौर और आर्द्रभूमि वाले क्षेत्रों को बेहतर तरीके से विकसित करने पर जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत चौर क्षेत्रों का ऐसा विकास करने की कोशिश है, जिससे एक ही जगह पर मछली पालन के साथ खेती, बागवानी और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियां भी की जा सकें। सरकारी दस्तावेजों में इस योजना को राज्य में उपलब्ध निजी और सरकारी चौर क्षेत्रों के समेकित विकास से जोड़ा गया है।

चौर की जमीन का होगा बेहतर इस्तेमाल

बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे इलाके हैं जहां बारिश या अन्य कारणों से लंबे समय तक पानी जमा रहता है। ऐसी जमीन का इस्तेमाल सामान्य खेती के लिए हमेशा आसान नहीं होता। सरकार की योजना ऐसे क्षेत्रों को विकसित कर उन्हें उत्पादन और रोजगार से जोड़ने की है। पुराने सरकारी दस्तावेजों के अनुसार योजना में चौर भूमि को विकसित कर मत्स्य पालन योग्य बनाने के साथ कृषि, बागवानी और कृषि वानिकी को भी जोड़ा जाना है।

सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को 50% सहायता

योजना के तहत अन्य वर्ग के लाभार्थियों को तालाब निर्माण की लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है। यानी पात्र लाभार्थी को निर्माण लागत का एक हिस्सा खुद वहन करना होगा, जबकि बाकी निर्धारित हिस्सा सरकारी सहायता के रूप में मिलेगा।

EBC, SC और ST को मिलेगा ज्यादा अनुदान 

अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लाभार्थियों के लिए सरकार ने अधिक सहायता का प्रावधान किया है। इन वर्गों के पात्र लाभार्थियों को तालाब निर्माण के लिए 70 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।

उद्यमी वर्ग के लिए 30% अनुदान

योजना में उद्यमी आधारित वर्ग को तालाब निर्माण पर 30 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान है। इस श्रेणी के लाभार्थियों को शेष राशि की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।

मछली पालन के साथ दूसरी गतिविधियां

इस योजना की खास बात यह है कि इसका फोकस केवल मछली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। चौर क्षेत्र में मछली पालन के साथ खेतों में दूसरी फसल, फल-सब्जियों की खेती और पेड़ लगाने जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की योजना है। सरकार के हरित बजट में योजना के बारे में बताया गया था कि इसके माध्यम से अतिरिक्त मछली उत्पादन बढ़ाने और मछली पालकों के रोजगार एवं आय को मजबूत करने का लक्ष्य है।

2026-27 में भी जारी हैं मत्स्य क्षेत्र के कार्यक्रम

वित्तीय वर्ष 2026-27 में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी कई योजनाओं के लिए राशि स्वीकृत की गई है। विभाग का लक्ष्य राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाना भी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार बिहार में मौजूदा मछली उत्पादन 9.17 लाख मीट्रिक टन बताया गया है और इसे 2028 तक 12.7 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

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