बिहार की हर ग्राम पंचायत में बनेगा विवाह मंडप, गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में मिलेगी सुविधा
8053 पंचायतों में निर्माण की योजना, 4026 करोड़ से अधिक का प्रावधान, निजी मैरिज हॉल के खर्च से मिलेगी राहत

पटना। बिहार के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकार ने एक अहम पहल की है। राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत विवाह मंडप यानी विवाह भवन बनाए जाएंगे। इन भवनों का इस्तेमाल खास तौर पर बेटियों की शादी जैसे कार्यक्रमों के लिए किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को शादी के लिए बेहतर और कम खर्च में जगह उपलब्ध कराना है।
8053 ग्राम पंचायतों में होगा निर्माण
पंचायती राज विभाग के अनुसार राज्य की 8053 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से विवाह मंडप बनाने की प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी है। इसके लिए कुल करीब 4026.50 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। यानी योजना को सिर्फ कुछ पंचायतों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि पूरे राज्य की ग्राम पंचायतों को इसके दायरे में लाने का लक्ष्य है।
कम खर्च में मिल सकेगा विवाह भवन
ग्रामीण इलाकों में शादी के लिए जगह की व्यवस्था करना कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। निजी मैरिज हॉल का किराया और दूसरे खर्च आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं। सरकार की योजना के तहत पंचायत स्तर पर विवाह मंडप उपलब्ध होने से ऐसे परिवारों को स्थानीय स्तर पर ही कार्यक्रम आयोजित करने की सुविधा मिल सकेगी। बिहार सरकार के बजट दस्तावेज में भी कहा गया था कि कन्या विवाह मंडप के जरिए गरीब परिवारों को कम शुल्क पर विवाह भवन और शादी से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
जीविका दीदियों को संचालन की जिम्मेदारी
योजना की एक खास बात यह है कि इन विवाह भवनों के संचालन की जिम्मेदारी जीविका से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों को देने की योजना है। इससे पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है। सरकारी जानकारी में विवाह भवनों का संचालन जीविका दीदियों करेंगी।
2026-27 में 1337 पंचायतों के लिए राशि
योजना पर काम भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। पंचायती राज विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1337 ग्राम पंचायतों में मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत निर्माण के लिए राशि आवंटित की है। विभाग के रिकॉर्ड में जून 2026 में इस संबंध में स्वीकृति और राशि आवंटन का जिक्र है।



