Trending Newsपटनाबिहारराजनीति

पटना शिक्षक सीट पर बदलेगा चुनावी समीकरण? नवल किशोर यादव के सामने डॉ. रंजन कुमार ने ठोकी ताल, जानिए कौन हैं ये पुराना छात्र नेता

नवल किशोर यादव के गढ़ में रंजन कुमार की दस्तक, शिक्षक सीट पर बढ़ी सियासी हलचल

पटना। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का 2026 का चुनाव इस बार काफी दिलचस्प होने वाला है। लंबे समय से इस सीट पर दबदबा बनाए रखने वाले भाजपा के प्रोफेसर नवल किशोर यादव के सामने इस बार कई चेहरे चुनौती पेश करने की तैयारी में हैं। राजद की ओर से पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार और जन सुराज से डॉ. दिव्या ज्योति की दावेदारी की चर्चा है। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर डॉ. रंजन कुमार भी शिक्षकों के बीच अपनी पकड़ बनाने में जुटे हैं।

डॉ. रंजन कुमार का नाम चुनावी मैदान में भले ही नया नजर आ रहा हो, लेकिन राजनीति में उनकी पारी नई नहीं है। उनका राजनीतिक सफर करीब डेढ़ दशक पुराना है। पटना जिले के घोसवरी प्रखंड के कड़रा गांव से आने वाले रंजन कुमार ने छात्र राजनीति से अपनी पहचान बनाई थी।

छात्र जदयू के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं रंजन कुमार

एक समय डॉ. रंजन कुमार जदयू की छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका में थे। वर्ष 2013 में वे छात्र जदयू के प्रदेश अध्यक्ष थे। इसी दौरान जदयू के छात्र संगठन का नाम बदलकर ‘छात्र समागम’ किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उस समय रंजन कुमार संगठन के प्रदेश स्तर पर नेतृत्व कर रहे थे।

इसके बाद 2014 में पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल में छात्र समागम का पहला स्थापना दिवस आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए थे। कार्यक्रम से पहले संगठन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष रंजन कुमार लगातार सक्रिय रहे।

रंजन कुमार की राजनीतिक सक्रियता सिर्फ पटना तक सीमित नहीं थी। नीतीश कुमार की संपर्क यात्रा के दौरान भागलपुर में हुई ‘छात्र समागम’ की बैठक में भी वे शामिल हुए थे। वर्ष 2015 में गया में आयोजित प्रमंडलीय सम्मेलन में उन्होंने विश्वविद्यालयों की समस्याओं और छात्र प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया था।

राजनीति से शिक्षा के क्षेत्र में गए

छात्र राजनीति के बाद रंजन कुमार धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और नालंदा कॉलेज, बिहारशरीफ के शिक्षा विभाग यानी बीएड से जुड़े। इसके बाद करीब एक दशक तक उनकी सक्रिय राजनीतिक मौजूदगी बहुत ज्यादा दिखाई नहीं दी।

अब 2026 में उन्होंने एक बार फिर राजनीति का रुख किया है। इस बार उनका मैदान छात्र राजनीति नहीं, बल्कि पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र है। रंजन कुमार इन दिनों ‘शिक्षक स्वाभिमान यात्रा’ के जरिए स्कूलों में पहुंचकर शिक्षकों से संवाद कर रहे हैं और समर्थन मांग रहे हैं।

6 अगस्त को पंडारक के ढीबर स्थित राजकीयकृत लक्ष्मी नारायण राजवंशी उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी उन्होंने शिक्षकों से मुलाकात की थी।

डॉ. रंजन कुमार के सामने बड़ी चुनौती

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में रंजन कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रोफेसर नवल किशोर यादव हैं। नवल किशोर यादव इस सीट से लगातार पांच बार जीत चुके हैं और लंबे समय से उनका मजबूत शिक्षक नेटवर्क माना जाता है। 2020 के चुनाव में उन्हें 3,176 वोट मिले थे, जबकि राजद के नारायण यादव को 1,913 वोट मिले थे। ऐसे में रंजन कुमार के लिए इस मजबूत राजनीतिक पकड़ को चुनौती देना आसान नहीं होगा।

हालांकि रंजन कुमार के पास छात्र राजनीति का पुराना संगठनात्मक अनुभव और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ाव है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button