
पटना। बिहार में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया में निगरानी स्वच्छता को लेकर व्यवस्था को और सख्त किया गया है। प्रमोशन के प्रस्ताव पर विचार करने से पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ निगरानी मामला, विभागीय कार्रवाई या गंभीर आपराधिक मामला तो लंबित नहीं है। इसके लिए निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र (Vigilance Clearance) की व्यवस्था लागू है।
प्रमोशन से पहले रिकॉर्ड की होगी जांच
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर जांच या भ्रष्टाचार से जुड़ी कार्रवाई लंबित होने की स्थिति में उसकी प्रोन्नति पर फैसला रिकॉर्ड की स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाए। निगरानी विभाग बिहार सरकार का वह विभाग है जो सरकारी सेवकों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की निगरानी और जांच से संबंधित कार्य करता है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर निगरानी मामलों की स्थिति और संबंधित अधिकारियों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है।
FIR होने पर क्या होगा?
किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। हालांकि, अगर उसके खिलाफ आपराधिक मामला, विभागीय कार्रवाई या निगरानी जांच लंबित है, तो उसकी Vigilance Clearance की स्थिति प्रभावित हो सकती है। प्रमोशन पर अंतिम निर्णय संबंधित सेवा नियमों और मामले की स्थिति के आधार पर लिया जाएगा। इसलिए केवल FIR दर्ज होने को सीधे तौर पर ‘दोषी’ मानना सही नहीं होगा।
फाइलों की जगह सूची से होगी निगरानी
रिपोर्टों के अनुसार नई व्यवस्था में प्रमोशन के मामलों में अलग-अलग फाइलों और पत्राचार पर निर्भरता कम करने का काम किया जा रहा है। निगरानी विभाग की ओर से तैयार आधिकारिक सूची के आधार पर अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी स्थिति की जांच की जाएगी। जानकारी के मुताबिक 30 जून 2026 तक जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन के प्रस्ताव लंबित या प्रस्तावित थे, उनके लिए अलग से निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी। इसके बाद के मामलों में नई व्यवस्था लागू होने की बात कही गई है।
पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
सरकार की इस व्यवस्था का मकसद प्रमोशन प्रक्रिया में निगरानी से संबंधित जानकारी को स्पष्ट रखना है। बिहार के सामान्य प्रशासन विभाग के पुराने सरकारी संकल्पों में भी प्रोन्नति से पहले निगरानी विभाग से स्वच्छता प्रमाण-पत्र की व्यवस्था का जिक्र किया गया है। ऐसे में प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए अब अपनी सेवा से जुड़े विभागीय, आपराधिक और निगरानी रिकॉर्ड की स्थिति जरूरी होगी।



