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शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान: सरकारी स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा की होगी पढ़ाई, पांच भाषाओं में होगा चयन

कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही और अंगिका में से एक अतिरिक्त भाषा शुरू करने की तैयारी है।

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को अब अपनी स्थानीय भाषा से भी जोड़ने की तैयारी हो रही है। शिक्षा विभाग कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए एक अतिरिक्त क्षेत्रीय भाषा शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही और अंगिका को विकल्प के तौर पर रखा गया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने 6 अक्टूबर को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इसकी जानकारी दी। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने से जुड़ी है।

बच्चों को पांच भाषाओं में से एक भाषा पढ़ने का विकल्प

प्रस्ताव के अनुसार कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को इन पांच क्षेत्रीय भाषाओं में से एक अतिरिक्त भाषा पढ़ाई जाएगी। यानी सभी बच्चों पर एक ही भाषा लागू नहीं होगी। संबंधित क्षेत्र और विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार भाषा का चयन किए जाने की योजना है। बिहार की अलग-अलग भाषाई पहचान को देखते हुए इस व्यवस्था में मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका को शामिल किया गया है। इससे बच्चों को शुरुआती कक्षाओं में अपने आसपास बोली जाने वाली भाषा के माध्यम से सीखने का अवसर मिल सकता है।

पहले से मौजूद है क्षेत्रीय भाषा की किताबों की व्यवस्था

बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक प्रकाशन निगम की वेबसाइट पर कक्षा 1 और कक्षा 5 के लिए मैथिली की पाठ्यपुस्तक उपलब्ध है। कक्षा 1 के पाठ्यक्रम में हिंदी, अंग्रेजी, गणित और उर्दू के साथ मैथिली की किताब भी सूचीबद्ध है। कक्षा 5 के लिए भी मैथिली की किताब सूचीबद्ध है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य के स्कूली शिक्षा तंत्र में क्षेत्रीय भाषा की पाठ्य सामग्री पहले से मौजूद है। हालांकि, पांचों भाषाओं को अतिरिक्त भाषा के रूप में किस तरह और कब से लागू किया जाएगा, इसकी विस्तृत प्रक्रिया अभी विभाग की ओर से सामने आनी बाकी है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी मातृभाषा पर जोर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शुरुआती शिक्षा के दौरान बच्चों की घर की भाषा, मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। शिक्षा मंत्रालय के दस्तावेज में कहा गया है कि जहां संभव हो, कम से कम कक्षा 5 तक और बेहतर हो तो कक्षा 8 तक शिक्षा का माध्यम घर या स्थानीय भाषा रखा जाना चाहिए।

शिक्षकों और पाठ्य सामग्री की भी होगी जरूरत

क्षेत्रीय भाषाओं को स्कूलों में लागू करने के लिए पर्याप्त शिक्षक, पाठ्य सामग्री और प्रशिक्षण की जरूरत होगी। अभी शिक्षा विभाग ने योजना को लागू करने की दिशा में काम तेज करने की बात कही है। इसलिए आने वाले समय में भाषा के चयन, शिक्षक व्यवस्था, पाठ्यक्रम और पढ़ाई शुरू होने की तारीख को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।

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