
पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक शिक्षा को लेकर बड़ी तैयारी चल रही है। राज्य में कक्षा 6 से ही छात्रों को वोकेशनल और प्री-वोकेशनल शिक्षा से जोड़ने की योजना है। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) पाठ्यक्रम तैयार करने पर काम कर रहा है। मौजूदा योजना के अनुसार बच्चों को स्कूली पढ़ाई के साथ ऐसे कौशल सिखाए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल वे आगे रोजगार या अपना काम शुरू करने में कर सकें।
छठी कक्षा से मिलेगा कौशल प्रशिक्षण
बिहार शिक्षा विभाग की योजना के तहत व्यावसायिक शिक्षा को केवल बड़ी कक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे कक्षा 6 से शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है। पहले सरकारी स्कूलों में व्यवस्थित वोकेशनल शिक्षा मुख्य रूप से कक्षा 9 से शुरू होती थी। नई व्यवस्था में विद्यार्थियों को कम उम्र से ही अलग-अलग कामकाजी क्षेत्रों की जानकारी देने की तैयारी है।
555 स्कूलों में वोकेशनल शिक्षा
बिहार में 555 स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने की योजना है। इन स्कूलों में अलग-अलग ट्रेड उपलब्ध कराए जाएंगे। कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी अपने स्कूल में निर्धारित ट्रेड में से किसी एक को चुनकर उसकी पढ़ाई कर सकेंगे। प्रत्येक स्कूल में दो ट्रेड संचालित किए जाने की योजना बताई गई है। ट्रेड का निर्धारण जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के स्तर पर किया जाएगा। हर ट्रेड के साथ संबंधित जॉब रोल भी तय होंगे, ताकि विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिले कि प्रशिक्षण के बाद वे किन क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।
रोजगार के साथ स्वरोजगार पर जोर
नई व्यवस्था का फोकस सिर्फ नौकरी की तैयारी तक सीमित नहीं रहेगा। छात्रों में स्वरोजगार और उद्यम शुरू करने की समझ विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे स्कूल स्तर पर ही बच्चों को अलग-अलग कौशल और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
शिक्षकों को भी दिया जाएगा प्रशिक्ष
वोकेशनल शिक्षा को लागू करने के लिए शिक्षकों की भूमिका अहम होगी। इसी दिशा में SCERT की ओर से शिक्षकों और जिला स्तर के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण और विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सितंबर 2026 में पटना में इस विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की गई थी।
नए दौर के हिसाब से बदलेंगे कोर्स
बिहार सरकार अब ऐसे पुराने वोकेशनल पाठ्यक्रमों में बदलाव की भी तैयारी कर रही है, जो मौजूदा रोजगार बाजार की जरूरतों से मेल नहीं खाते। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सितंबर 2026 में कहा था कि राज्य में नए जमाने के पाठ्यक्रम लाने और पुराने कार्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना है।


