
पटना। बिहार में अब कचरा सिर्फ सफाई की समस्या नहीं रहेगा, बल्कि कमाई का जरिया बनाने की तैयारी है। कल बापू टावर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि पटना के वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को इस तरह विकसित किया जाएगा कि कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग से हर साल करीब 50 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हो सके।
कचरे से कमाई का क्या है सरकार का प्लान?
सरकार का फोकस कचरे को सीधे फेंकने के बजाय उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उपयोगी सामग्री में बदलने पर है। इसके लिए कचरे की प्रोसेसिंग, रिसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इससे एक तरफ शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ कचरे से आर्थिक गतिविधियां भी पैदा हो सकती हैं। बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग के पास पहले से Waste to Compost और Material Recovery Facility जैसी परियोजनाओं के लिए मॉडल प्रस्ताव उपलब्ध हैं। इनका उद्देश्य ठोस कचरे को व्यवस्थित तरीके से संभालना और उपयोगी सामग्री को अलग करना है।
पहले से चल रही है कचरा प्रबंधन की तैयारी
सरकार ने शहरी इलाकों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम शुरू किया है। अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए PPP मॉडल के इस्तेमाल और कचरे के बेहतर प्रबंधन एवं सदुपयोग पर जोर दिया गया था।जून 2026 में भी मुख्यमंत्री ने पटना को साफ-सुथरा बनाने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने की बात कही थी। इसी दौरान ‘वेस्ट टू वंडर’ थीम पर लोकनायक जय प्रकाश नारायण पार्क की योजना का भी जिक्र किया गया था।
कचरे से रोजगार के मिलेंगे अवसर
कचरे की छंटाई, रिसाइक्लिंग और प्रोसेसिंग का नेटवर्क बढ़ने से इससे जुड़े कामों में रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं। खासकर प्लास्टिक, धातु, कागज और दूसरे रिसाइकिल होने वाले पदार्थों को अलग करके दोबारा इस्तेमाल में लाने पर जोर दिया जा सकता है।
सरकार की सोच सिर्फ कचरा उठाने तक सीमित नहीं है। इसे ‘Waste to Wealth’ यानी कचरे से संपदा बनाने की दिशा में ले जाने की कोशिश है। बिहार में पहले से ही बायोफ्यूल और कम्प्रेस्ड बायोगैस जैसे क्षेत्रों को कचरे से उपयोगी ऊर्जा बनाने की संभावनाओं से जोड़ा जा रहा है।
स्वच्छता अभियान पर भी सीएम ने दिया जोर
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब सरकार स्वच्छता को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। 1 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत खुद स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया और लोगों से घर, कार्यस्थल और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने की अपील की।



