बिहार में बाढ़ प्रभावित परिवारों को फिर मिलेगी राहत, दशहरा से पहले खाते में आएंगे 7 हजार रुपये
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दशहरा से पहले बाढ़ पीड़ित परिवारों को 7 हजार रुपए देने का ऐलान किया है।

पटना। बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए सरकार ने राहत राशि देने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों की पहचान कर दशहरा से पहले 7,000 रुपये प्रति परिवार की अनुग्रह सहायता उपलब्ध कराई जाए। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
पात्र परिवारों की पहचान पर जोर
मुख्यमंत्री ने 30 सितंबर को पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद उन्होंने बैरिया प्रखंड के बथना स्थित राहत शिविर का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। इसी दौरान प्रभावित परिवारों को त्योहार से पहले आर्थिक मदद पहुंचाने का निर्देश दिया गया। सरकार की ओर से कहा गया है कि सहायता के लिए प्रभावित परिवारों का चिन्हीकरण और सत्यापन जरूरी होगा। इसके बाद पात्र लोगों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
पहले भी भेजी जा चुकी है सहायता राशि
बाढ़ प्रभावित परिवारों को 7,000 रुपये की सहायता पहले भी दी जा चुकी है। बिहार सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार 15 सितंबर को 8,27,472 परिवारों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 579.23 करोड़ रुपये की अनुग्रह राहत राशि भेजने की शुरुआत की गई थी।
सरकार के अनुसार उस समय राज्य के 15 जिले, 88 प्रखंड, 575 ग्राम पंचायत और 2,642 गांव के साथ 21 शहरों के 136 वार्ड बाढ़ से प्रभावित बताए गए थे। राहत एवं बचाव कार्यों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी लगाई गई थीं।
राहत शिविरों में सुविधाओं की समीक्षा
पश्चिम चंपारण के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, पेयजल, शौचालय और रहने की व्यवस्था का निरीक्षण किया। पशुओं के लिए बनाए गए राहत शिविर और शेड की जानकारी भी ली गई। बच्चों के लिए चल रहे अस्थायी आंगनबाड़ी शिविर का भी जायजा लिया गया।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जब तक प्रभावित परिवार अपने घरों में सुरक्षित तरीके से वापस नहीं लौटते, तब तक जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई जारी रखी जाए।
नाव, राशन और बचाव व्यवस्था पर भी निर्देश
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पर्याप्त नावों की व्यवस्था रखने और जरूरत के अनुसार पानी निकालने के लिए स्लुइस गेट खोलने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही नदियों के जलस्तर, तटबंधों और कटाव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। प्रभावित लोगों तक सूखा राशन और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाने के साथ पशुओं के लिए चारा और आश्रय की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।


