
पटना। बिहार में अब पर्यटन को सिर्फ ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि, राज्य सरकार डैम, जलाशयों, पहाड़ी और वन क्षेत्रों को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 5 अक्टूबर को हुई समीक्षा बैठक में फैसला लिया है। उन्होंने जलाशयों और डैम के आसपास पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पर्यटन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
इन डैम के आसपास होगा विकास
सरकार की बैठक में बांका के ओढ़नी डैम, मुंगेर के खड़गपुर डैम, नवादा के ताराकोल डैम और मुंगेर के जालकुंड डैम को लेकर विशेष चर्चा हुई। खड़गपुर डैम के पास ईको-टूरिज्म से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने और पर्यटकों के लिए ग्लास रूम बनाने की बात कही गई है। इसके अलावा खगड़िया की कसरैया धार को भी ईको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया गया है। बड़े तालाबों और जलाशयों के आसपास बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा।
निजी निवेश से भी विकसित होंगे पर्यटन स्थल
जहां सरकारी जमीन पर्याप्त नहीं होगी, वहां जरूरत के अनुसार जमीन खरीदने या अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसके बाद पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल से पर्यटन परियोजनाएं विकसित करने की योजना है। अधिकारिक जानकारी के मुताबिक, राज्य में 29 बड़े डैम और 247 तालाबों को पर्यटन की संभावनाओं से जोड़ने के लिए निजी निवेशकों को आमंत्रित किया गया है।
पर्यटकों को मिल सकती हैं ये सुविधाएं
बिहार की ईको-टूरिज्म नीति में प्राकृतिक स्थलों के अनुसार नेचर कैंप, पर्यावरण अनुकूल ठहरने की सुविधा, ट्रेकिंग, नेचर वॉक, नदी क्रूज, एडवेंचर स्पोर्ट्स और विजिटर इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी सुविधाओं का प्रावधान है। जलाशय आधारित पर्यटन में बोटिंग और अन्य जल गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा।
ओढ़नी डैम पर पहले से शुरू हैं जल गतिविधियां
बांका का ओढ़नी डैम बिहार के ईको सर्किट में शामिल है। पर्यटन विभाग के अनुसार यहां मोटरबोट, स्पीड बोट और जेट स्की जैसी जल गतिविधियां शुरू की जा चुकी हैं। पार्किंग और खाने-पीने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।



