बिहार में 50 लाख महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने का लक्ष्य, आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर
राज्य सरकार गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, महिलाओं की आमदनी मजबूत करने और दूध उत्पादन से लेकर बिक्री तक उनकी भागीदारी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।

पटना। बिहार सरकार ने वर्ष 2030 तक एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की योजना के तहत 50 लाख से अधिक महिलाओं को डेयरी व्यवसाय और दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इस पहल के जरिए महिलाओं को गांव में ही कमाई के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को 80 प्रतिशत तक पहुंचाना भी है।
सुधा केंद्रों से बढ़ेंगे महिलाओं के कारोबार के अवसर
सरकार पंचायत स्तर पर सुधा दूध बिक्री केंद्र खोलने की योजना पर भी काम कर रही है। इन केंद्रों के संचालन में जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इससे महिलाएं केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री के जरिए भी आमदनी कर सकेंगी।
हर गांव में दूध उत्पादक समितियां बनाने की तैयारी
बिहार सरकार ने राज्य के सभी 39,073 राजस्व गांवों में दूध उत्पादक समितियां गठित करने की योजना बनाई है। फरवरी 2026 में घोषित इस पहल के तहत उस समय तक 25,593 गांवों में समितियां गठित होने की जानकारी दी गई थी। शेष गांवों में अगले दो वर्षों के दौरान समितियां बनाने का लक्ष्य रखा गया। इन समितियों के माध्यम से दूध की खरीद और पशुपालकों को उचित कीमत दिलाने पर जोर है।
जीविका दीदियों की सफलता से बढ़ी उम्मीद
डेयरी व्यवसाय में महिलाओं की भागीदारी का एक उदाहरण सहरसा की कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी है। किसान तक की 5 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 तक इस कंपनी से 49,344 महिलाएं जुड़ी थीं। कंपनी का औसत दैनिक दूध संग्रह बढ़कर 94,180 किलोग्राम पहुंच गया था। यह उदाहरण बताता है कि महिलाओं को संगठित बाजार और जरूरी सुविधाएं मिलने पर डेयरी कारोबार का विस्तार हो सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
डेयरी क्षेत्र के विस्तार से महिलाओं के साथ पशुपालक परिवारों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। दूध की नियमित बिक्री, संग्रह केंद्रों और स्थानीय बाजारों की बेहतर व्यवस्था से गांवों में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। हालांकि, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पशुओं के चारे, स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशिक्षण और दूध के उचित मूल्य जैसी जरूरतों पर भी ध्यान देना होगा


