
पटना | 11 जून 2026
बिहार सरकार ने भूमि संबंधी लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राज्य के सभी अंचलों में 11 जून से 17 जून तक विशेष शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस अभियान को केवल औपचारिकता न समझा जाए। निर्धारित लक्ष्य पूरा करना अंचल और राजस्व अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी तथा लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने बुधवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि राजस्व महाअभियान के दौरान प्राप्त लाखों लंबित आवेदनों के निष्पादन के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान रविवार को भी शिविर संचालित होंगे ताकि अधिक से अधिक मामलों का निपटारा किया जा सके।
46 लाख से अधिक आवेदनों के निपटारे पर फोकस
राजस्व विभाग के अनुसार, भूमि अभिलेखों में सुधार, डिजिटल जमाबंदी की त्रुटियों के संशोधन, छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करने, उत्तराधिकार आधारित नामांतरण और बंटवारा आधारित नामांतरण से जुड़े लगभग 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों के निपटारे का लक्ष्य पहले 31 मार्च 2026 तक रखा गया था, लेकिन कई जिलों में कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अब तक लगभग 81.91 प्रतिशत आवेदनों की स्कैनिंग हुई है, जबकि केवल 26.43 प्रतिशत आवेदन ही संबंधित पोर्टलों पर अपलोड किए जा सके हैं। सरकार ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए विशेष अभियान के माध्यम से शत-प्रतिशत स्कैनिंग और अपलोडिंग का लक्ष्य निर्धारित किया है।
जिलाधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी
प्रेस वार्ता में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और राजस्व विभाग के सचिव जय सिंह भी मौजूद थे। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं, अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। अभियान की निगरानी जिलाधिकारी स्तर से की जाएगी।
आम लोगों को क्या मिलेगा लाभ?
इस विशेष शिविर के माध्यम से जमीन से जुड़े लंबित मामलों के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है। डिजिटल जमाबंदी सुधार, दाखिल-खारिज, नामांतरण और बंटवारे से संबंधित समस्याओं का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, जिससे लाखों रैयतों को राहत मिल सकती है।



