
पटना: बिहार सरकार राज्य में ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना चला रही है। इस योजना के तहत पात्र लोगों को बस या मिनी बस खरीदने के लिए 5 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और सुदूर इलाकों को जिला मुख्यालय से जोड़ना और लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
हर प्रखंड से 7 लाभार्थियों का चयन
मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना को जिला मुख्यालय वाले प्रखंड को छोड़कर राज्य के 496 प्रखंडों में लागू किया जाना है। प्रत्येक प्रखंड से 7 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। इनमें अनुसूचित वर्ग से 2, अत्यंत पिछड़ा वर्ग से 2, पिछड़ा वर्ग से 1, अल्पसंख्यक समुदाय से 1 और सामान्य वर्ग से 1 व्यक्ति शामिल होंगे।
जिन प्रखंडों में अनुसूचित वर्ग की आबादी 1,000 से अधिक होगी, वहां एक अतिरिक्त अनुसूचित वर्ग के लाभार्थी का चयन किया जा सकता है। योजना के तहत बस खरीदने वाले लोगों को पात्रता के अनुसार अनुदान दिया जाएगा। मिनी बस खरीदने वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कौन कर सकता है आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए। साथ ही, उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है। आवेदक सरकारी नौकरी में कार्यरत नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, जिस प्रखंड से आवेदन किया जा रहा है, वहां का स्थायी निवासी होना भी आवश्यक है।
कैसे होगा लाभार्थियों का चयन?
मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से परिवहन विभाग के पोर्टल पर किया जा सकता है। आवेदनों की जांच के बाद विभाग द्वारा प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी। इसमें मैट्रिक परीक्षा में प्राप्त अंकों को आधार बनाया जाएगा। समान अंक होने पर अधिक उम्र वाले आवेदक को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके बाद गठित समिति द्वारा लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। स्वीकृत सूची के साथ प्रतीक्षा सूची भी जारी होगी। सूची पर आपत्ति होने पर आवेदक तीन दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम सूची जारी की जाएगी।
अनुदान राशि और जरूरी नियम
चयनित लाभार्थी को बस खरीदने के बाद अनुदान प्राप्त करने के लिए विभाग में आवेदन जमा करना होगा। जानकारी के अनुसार, आवेदन के तीन दिनों के भीतर राशि बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
योजना के तहत खरीदी गई बस को पांच साल तक अनुमंडल पदाधिकारी की लिखित अनुमति के बिना बेचने की अनुमति नहीं होगी। ऋण लेकर बस खरीदने वाले लाभार्थी अनुदान राशि का इस्तेमाल केवल ऋण चुकाने के लिए कर सकेंगे।



