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West Bengal: ममता बनर्जी का CEC को दूसरा पत्र, SIR प्रक्रिया पर दो गंभीर सवाल, क्या राजनीतिक दल के इशारे पर हो रहा दखल?

पहला सवाल: जिला कार्यालयों में सक्षम पेशेवर होने के बावजूद 1000 बाहरी डेटा एंट्री ऑपरेटरों की RFP क्यों जारी की गई?

West Bengal: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को एक हफ्ते के अंदर दूसरी चिट्ठी लिखकर चुनावी मतदाता सूची संशोधन (SIR) से जुड़े दो चिंताजनक मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में उन्होंने इन कदमों को निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाला बताया और सीधे पूछा कि क्या ये फैसले किसी राजनीतिक दल के दबाव में लिए जा रहे हैं। यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया गया, जो राज्य में चुनावी माहौल को और गरमा सकता है।

SIR प्रक्रिया पर ममता का हमला: बाहरी 1000 लोगों की नियुक्ति क्यों?

ममता बनर्जी ने पत्र में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के हालिया निर्देशों का हवाला देते हुए पहला मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि CEO ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को SIR या अन्य चुनावी डेटा कार्यों के लिए संविदा पर डेटा एंट्री ऑपरेटरों और बांग्ला सहायता केंद्र (BSK) कर्मचारियों की भर्ती न करने का आदेश दिया है। लेकिन उसी समय CEO कार्यालय ने 1,000 डेटा एंट्री ऑपरेटरों और 50 सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की नियुक्ति के लिए RFP (Request for Proposal) जारी कर दिया। बनर्जी ने आश्चर्य जताते हुए पूछा, “जिला कार्यालयों में पहले से सक्षम पेशेवर मौजूद हैं, फिर बाहरी 1,000 लोगों की क्या जरूरत? क्या यह RFP किसी राजनीतिक दल के इशारे पर अपने स्वार्थ साधने के लिए जारी किया गया है?”

उन्होंने कहा कि इस RFP का समय और तरीका जायज संदेह पैदा करता है। परंपरागत रूप से जिला कार्यालय खुद ऐसी भर्तियां करते रहे हैं। ममता ने CEC से इसकी पारदर्शी जांच की मांग की, ताकि चुनाव आयोग की निष्पक्ष छवि बनी रहे।

निजी घरों में मतदान केंद्र का प्रस्ताव: निष्पक्षता का उल्लंघन क्यों?

पत्र का दूसरा हिस्सा निजी आवासीय परिसरों में मतदान केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर केंद्रित है। बनर्जी ने इसे निष्पक्षता से समझौता करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि मतदान केंद्र हमेशा सरकारी या अर्ध-सरकारी भवनों में ही लगाए जाते हैं, ताकि सभी को सुगम पहुंच हो और भेदभाव न हो। निजी घरों में लगाने से निवासियों और आम जनता के बीच विभेद पैदा होगा। उन्होंने सवाल किया, “ऐसा कदम क्यों उठाने पर विचार हो रहा है? क्या यह किसी राजनीतिक दल के दबाव में पक्षपातपूर्ण हित साधने के लिए है?”

SIR का संदर्भ: BLO सुसाइड और राजनीतिक आरोपों का केंद्र

SIR (Special Intensive Revision) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जो चुनाव आयोग ने हाल ही में शुरू की। लेकिन पश्चिम बंगाल में यह विवादास्पद हो गई है। BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की सुसाइड और पारिवारिक पुनर्मिलन जैसे मामलों से जुड़े आरोपों ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया। ममता ने पहले ही SIR को तुरंत रोकने की मांग की थी, इसे चुनावी प्रक्रिया में बाधा बताते हुए। विपक्षी भाजपा इसे निष्पक्षता का प्रयास बता रही है, लेकिन ममता का पत्र आयोग पर दबाव बढ़ा रहा है।

CEC से अपील: निष्पक्ष जांच जरूरी, आयोग की गरिमा दांव पर

पत्र के अंत में बनर्जी ने CEC से इन मुद्दों की “गंभीरता, निष्पक्षता और पारदर्शिता” से जांच करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आयोग की विश्वसनीयता किसी भी परिस्थिति में दागदार नहीं होनी चाहिए। यह पत्र आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता का यह कदम टीएमसी को मजबूत बनाएगा, जबकि भाजपा इसे आयोग के खिलाफ हमला बता रही है।

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