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Bihar News: मुजफ्फरपुर में माइक्रोफाइनेंस कर्ज से आत्महत्या के मामले बढ़े, परिवार संकट में - गरीबों पर बोझ बन रही योजनाएं

सकरा सहित कई इलाकों में ज्यादा ब्याज व धमकी से आत्महत्या के मामले बढ़े; गरीब परिवार संकट में, प्रशासन छापेमारी कर रहा

Bihar News: मुजफ्फरपुर जिले में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कर्ज से लोग परेशान हैं। कई मामलों में कर्ज नहीं चुकाने की वजह से लोग आत्महत्या कर रहे हैं। परिवार बर्बाद हो रहे हैं। सकरा, औराई, कटरा जैसे इलाकों में यह समस्या ज्यादा है। गरीब महिलाएं और मजदूर छोटे कर्ज लेते हैं, लेकिन ज्यादा ब्याज और सख्त वसूली से फंस जाते हैं। प्रशासन अब सतर्क हो गया है, लेकिन पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं हो रहा।

कर्ज से कैसे हो रही मौतें?

माइक्रोफाइनेंस कंपनियां गरीबों को आसानी से 20-50 हजार रुपये कर्ज देती हैं। ब्याज 20-30 फीसदी तक होता है। समय पर नहीं चुकाने पर एजेंट घर आकर धमकाते हैं। सामान उठा लेते हैं या बदनामी करते हैं।

हाल ही में सकरा में एक परिवार के चार लोगों ने कर्ज के बोझ से आत्महत्या कर ली। कई अन्य मामलों में लोग जहर खा चुके हैं या फांसी लगा चुके हैं। महिलाएं सबसे ज्यादा शिकार हैं। वे समूह बनाकर कर्ज लेती हैं, लेकिन काम नहीं चला तो पूरा समूह फंस जाता है।

एक पीड़ित परिवार ने बताया कि 50 हजार का कर्ज लिया था। ब्याज समेत 2 लाख हो गया। एजेंट रोज धमकी देते थे। अब परिवार बेघर हो गया है।

कंपनियां कैसे फंसाती हैं?

कंपनियां गांव-गांव जाकर मीटिंग करती हैं। आसान कर्ज का लालच देती हैं। कागजों में कम ब्याज लिखा जाता है, लेकिन असल में ज्यादा वसूलते हैं। हफ्ते में किस्त मांगते हैं। नहीं देने पर बेइज्जती करते हैं। कई कंपनियां बिना लाइसेंस के काम कर रही हैं।

ग्रामीण महिलाएं छोटे कारोबार के लिए कर्ज लेती हैं। लेकिन महंगाई और कम कमाई से चुकता नहीं होता। परिवार पर बोझ बढ़ता है।

प्रशासन क्या कर रहा?

जिला प्रशासन ने कई कंपनियों पर छापेमारी की है। अवैध वसूली करने वालों पर मुकदमा दर्ज हो रहा है। डीएम ने कहा कि गरीबों को लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कंपनियों की लिस्ट जांच की जा रही है।

पुलिस ने कुछ एजेंटों को पकड़ा है। पीड़ितों से अपील की है कि शिकायत करें। हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

Bihar News: आगे क्या उपाय?

विशेषज्ञ कहते हैं कि माइक्रोफाइनेंस योजनाएं गरीबों के लिए हैं, लेकिन सही नियंत्रण नहीं है। ब्याज दर सीमित होनी चाहिए। कंपनियों पर सख्ती हो। ग्रामीणों को जागरूक करें कि ज्यादा कर्ज न लें। सरकार आसान लोन की अन्य योजनाएं चला रही है।

मुजफ्फरपुर के लोग मांग कर रहे हैं कि दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई हो। पीड़ित परिवारों को मदद मिले। कर्ज से मौतें रुकें। यह समस्या सिर्फ मुजफ्फरपुर की नहीं, पूरे बिहार की है। सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। गरीबों की जिंदगी बचानी होगी।

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