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Bihar Politics: उपेंद्र कुशवाहा की RLM में फूट की अटकलें, क्या तीन विधायक तोड़ेंगे नाता, जानिए कौन हैं ये चेहरे

माधव आनंद, अलोक कुमार सिंह व रामेश्वर कुमार महतो के पार्टी छोड़ने की चर्चा; एनडीए पर असर संभावित

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में फूट की खबरें गरम हैं। पार्टी के शो ऑफ स्ट्रेंथ जैसे कार्यक्रम में चार में से तीन विधायकों की गैरमौजूदगी ने अटकलों को हवा दे दी है। माधव आनंद, अलोक कुमार सिंह और रामेश्वर महतो पर पार्टी से दूरी बनाने का संदेह है। ये तीनों कुशवाहा-ओबीसी आधार को मजबूत करने वाले चेहरे थे। उनकी नाराजगी से RLM का जनाधार कमजोर हो सकता है। एनडीए में छोटे दलों की अस्थिरता बढ़ेगी, जो सरकार के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

माधव आनंद (मधुबनी सीट)

माधव आनंद RLM के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव और विधायक दल के नेता हैं। लंबे समय से उपेंद्र कुशवाहा के करीबी सहयोगी रहे हैं। 2025 चुनाव में मधुबनी से RJD के सिटिंग विधायक समीर महासेठ को 20,552 वोटों से हराकर जीते। सोशल मीडिया पर सक्रिय और ओबीसी नेतृत्व के चेहरे के रूप में उभरे। पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन अब दूरी की चर्चा।

अलोक कुमार सिंह (दिनारा सीट)

अलोक कुमार सिंह दिनारा विधानसभा से RLM टिकट पर पहली बार विधायक बने। ग्रेजुएट और पेशे से व्यवसायी। 2025 चुनाव में निर्दलीय अभिषेक रंजन को 78,338 वोटों के बड़े अंतर से हराया। कैमूर-रोहतास बेल्ट में जनसेवा और सामाजिक कामों से पकड़ बनाई। विकास, सड़क और रोजगार के मुद्दों पर आक्रामक। सोशल मीडिया पर मजबूत मौजूदगी। हाल में नितिन नवीन से मिले, लेकिन पार्टी कार्यक्रम से दूर।

रामेश्वर कुमार महतो (बाजपट्टी सीट)

रामेश्वर कुमार महतो बाजपट्टी से विधायक हैं। राजनीति में आने से पहले क्रॉकरी और मार्बल्स का कारोबार करते थे। बीकॉम तक पढ़ाई की। जेडीयू के मधुबनी जिला अध्यक्ष रह चुके। 2018-2024 तक विधान परिषद सदस्य। 2025 में RJD के मुकेश कुमार को 3,395 वोटों से हराया। कुशवाहा नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए।

Bihar Politics: पार्टी में क्या हो रहा?

RLM ने 2025 चुनाव में एनडीए के हिस्से से 6 सीटें लड़ीं। 4 पर जीत मिली: बाजपट्टी (रामेश्वर महतो), मधुबनी (माधव आनंद), दिनारा (अलोक सिंह) और सासाराम (स्नेहलता कुशवाहा)। तीन विधायकों की दूरी से पार्टी में टूट की आशंका। वे नितिन नवीन से मिले, लेकिन कुशवाहा के कार्यक्रम में नहीं आए।

अगर ये विधायक बगावत करते हैं तो RLM कमजोर हो सकती है। उपेंद्र कुशवाहा को नया गठबंधन तलाशना पड़ सकता है।

बिहार में छोटे दलों की यह अस्थिरता एनडीए को प्रभावित कर सकती है। 2025 चुनाव के बाद का यह पहला बड़ा संकट है। स्थिति साफ होने में समय लगेगा।

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