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साइबर अपराध एक अंतरराष्ट्रीय समस्या !

साइबर अपराध आज के नए जमाने के टेक्नोलॉजी से संपन्न अपराधियों के द्वारा किया जाने वाला नए प्रकार का अपराध है| आज के समय में साइबर अपराध एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन गई है | इसीलिए भारत में एक साइबर कानून बनाया गया है , यह साइबर कानून डिजिटल दुनिया में होने वाले अपराधों और सुरक्षा को नियंत्रित करने वाले कानूनों का एक समूह है | यह मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी एक्ट) पर आधारित है, जो साइबर अपराधों जैसे हैकिंग, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटता है।

प्रमुख कानून :-
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 हैकिंग और डेटा क्षति के लिए सजा का प्रावधान करती है, जबकि धारा 66 एफ साइबर आतंकवाद को परिभाषित करती है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराएं जैसे 420 (धोखाधड़ी) भी साइबर मामलों में लागू होती हैं।

साइबर अपराध के प्रकार :-

  • सामान्य अपराधों में फिशिंग, रैनसमवेयर हमले और पहचान चोरी शामिल हैं, जो 2025 में भारत में आरएस 1.2 लाख करोड़ के नुकसान हमलों की निगरानी करती हैं, जबकि 14 सी साइबर धोखाधड़ी का समन्वय करता है।

भारत में प्रमुख साइबर अपराध और दंड क्या हैं?

  • भारत में साइबर अपराध डिजिटल माध्यमों से किए जाने वाले अपराध हैं, जिनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी एक्ट) इनका मुख्य कानून है, जिसमें विभिन्न धाराओं के तहत सजाएं निर्धारित हैं।

प्रमुख अपराध :-

  • हैकिंग (धारा 66): कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाना या अनधिकृत पहुंच। दंड: 3 वर्ष तक कैद और/या 5 लाख रुपये जुर्माना।
  • पासवर्ड चोरी (धारा 66 सी):- धोखे से पासवर्ड या डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग। दंड: 3 वर्ष तक कैद और/या 1 लाख रुपये जुर्माना।
  • निजी तस्वीरें प्रकाशित करना (धारा 66 ए):- बिना सहमति निजी छवियां साझा करना। दंड: 3 वर्ष तक कैद और / या 2 लाख रुपये जुर्माना।
  • साइबर आतंकवाद (धारा 66 एफ): – राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा। दंड: 5 वर्ष तक कैद और/या 10 लाख रुपये जुर्माना।
  • यौन सामग्री प्रसार (धारा 67 ए): स्पष्ट यौन छवियां प्रकाशित करना। दंड: पहली बार 5 वर्ष कैद, दोबारा 7 वर्ष और जुर्माना।
  • बाल अश्लीलता (धारा 67 बी): बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री। दंड: 5 वर्ष तक कैद और जुर्माना।
  • फिशिंग और धोखाधड़ीः – निवेश स्कैम, डिजिटल अरेस्ट। आईपीसी धारा 420 के साथ आई टी एक्ट लागू।

रिपोर्टिंग और रोकथाम

साइबर अपराध की शिकायत cybercrime.gov.in या 1930 पर करें। सीईआरटी-इन और 14 सी निगरानी करते हैं।

फिशिंग और ओटीपी फ्रॉड से बचने के तरीके क्या हैं?

  • फिशिंग और ओटीपी फ्रॉड डिजिटल धोखाधड़ी के सामान्य रूप हैं, जहां ठग संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं। इनसे बचाव के लिए सतर्कता और सरल आदतें अपनाएं।
  • अनजान ईमेल, एसएमएस या लिंक पर क्लिक न करें; सीधे आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    संदेशों में व्याकरण त्रुटियां या जल्दबाजी की मांग हो तो संदेह करें और भेजने वाले की पुष्टि करें।
    एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपडेट रखें।
  • कभी भी ओटीपी, पासवर्ड या बैंक विवरण फोन, मैसेज या ईमेल पर न शेयर करें, भले ही कॉलर बैंक का दावा करे।
  • संदिग्ध नंबर ब्लॉक करें और आधिकारिक नंबर पर खुद संपर्क करें।
  • बैंक स्टेटमेंट नियमित जांचें और अनधिकृत लेनदेन पर तुरंत रिपोर्ट करें।
  • शिकायत cybercrime.gov.in पर दर्ज करें या 1930 पर कॉल करें। जागरूकता से 90% फ्रॉड रोके जा सकते हैं।

निष्कर्ष रूप में यही कहा जा सकता है कि नए जमाने का नए प्रकार का साइबर अपराध जो अब एक विकराल रूप ले चुका है क्योंकि अब साइबर अपराध एक राष्ट्रीय समस्या नहीं है बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन चुकी है, इससे आज के समय में सभी प्रभावित हैं चाहे वह डॉक्टर हो, इंजीनियर हो, पुलिस हो, जज हो, व्यवसायी हो, छात्र हो, महिलाएं हों सभी लोग इसके दायरे में हैं और आए दिन नए-नए प्रकार के साइबर ठगी की शिकायतें प्राप्त होते रहती हैं | आज के समय में जितने टेक्नोलॉजी बढती जा रही है उतने ही साइबर अपराध की संभावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं, इसलिए सरकार को इस विषय पर गंभीरता से सोचनी चाहिए और साइबर अपराध से बचने के तरीकों का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया एवं जगह-जगह पर कैंप लगाकर आम जनता को साइबर फ्रॉड से बचाव के तरीकों के बारे में लीगल अवेयरनेस प्रोग्राम चलाना चाहिए, क्योंकि जानकारी ही बचाव है सावधानी हटी दुर्घटना घटी | सावधान रहें और सुरक्षित रहें |

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