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Bihar News: बिहार में ERSS चालकों को बड़ा तोहफा, मासिक मानदेय 30 हजार रुपये, 4 हजार का वार्षिक वर्दी भत्ता

बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने राजस्व विभाग के टोल-फ्री नंबर पर 10 बार कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

Bihar News: पटना, बिहार सरकार ने आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) के तहत तैनात रिटायर्ड आर्मी ड्राइवरों की सेवा अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। साथ ही उनका मासिक मानदेय 25 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया है। हर साल 4 हजार रुपये का वर्दी भत्ता भी मंजूर किया गया है। यह फैसला ERSS सेवाओं में कोई व्यवधान न आए, इसको ध्यान में रखकर लिया गया है।

ERSS क्या है और चालक कौन हैं

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ERSS यानी इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम बिहार में आपात स्थिति में त्वरित मदद पहुंचाने की व्यवस्था है। इसमें दुर्घटना, स्वास्थ्य आपात, कानून-व्यवस्था, आपदा जैसी स्थितियों में इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल तैनात किए जाते हैं। इन वाहनों के चालक मुख्य रूप से रिटायर्ड आर्मी ड्राइवर होते हैं। ये चालक अनुभवी और विश्वसनीय होते हैं। राज्य में कुल 4426 पद स्वीकृत हैं। इनमें 3418 चालक सिपाही और 1009 चालक हवलदार के पद शामिल हैं। फिलहाल ये रिटायर्ड आर्मी ड्राइवर काम कर रहे हैं। नई भर्ती की प्रक्रिया चल रही है लेकिन इसमें समय लगेगा। इसलिए सेवा अवधि बढ़ाने का फैसला हुआ।

मानदेय और भत्ते में बढ़ोतरी

  • मासिक मानदेय: पहले 25 हजार रुपये था, अब 30 हजार रुपये प्रतिमाह।
  • वार्षिक वर्दी भत्ता: 4 हजार रुपये सालाना, यह बढ़ोतरी चालकों के काम की जिम्मेदारी और महत्व को देखते हुए की गई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ERSS सेवाएं बिना रुके चलती रहनी चाहिए। नई भर्ती और ट्रेनिंग में समय लगेगा। इसलिए रिटायर्ड आर्मी ड्राइवरों की सेवा एक साल और बढ़ाई गई है।

सेवा अवधि बढ़ाने का कारण

पहले इन चालकों की सेवा मार्च 2026 तक थी। अब इसे एक साल और बढ़ाया गया है। इससे ERSS वाहनों की उपलब्धता बनी रहेगी। राज्य में आपात सेवाएं 112 नंबर पर चलती हैं। ये चालक तेजी से घटनास्थल पर पहुंचते हैं। अगर सेवा रुकती तो आपात मदद प्रभावित होती। सरकार ने इसे रोकने के लिए यह कदम उठाया।

भर्ती की स्थिति

ERSS प्रोजेक्ट के तहत 4426 पदों पर स्थायी भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन भर्ती और ट्रेनिंग में काफी समय लगेगा। तब तक रिटायर्ड आर्मी ड्राइवरों पर निर्भरता बनी रहेगी। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं।

ERSS सेवाओं का महत्व

बिहार में ERSS ने आपात स्थितियों में जान बचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। चालक अनुशासित और तेज होते हैं। यह फैसला चालकों के मनोबल को बढ़ाएगा। साथ ही सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहेगी।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि ERSS बिहार की आपातकालीन सेवाओं का मजबूत स्तंभ है। चालकों की मेहनत सराहनीय है। सरकार उनके हितों का ध्यान रख रही है। यह फैसला ERSS को और प्रभावी बनाने की दिशा में है।

बिहार सरकार का यह कदम सराहनीय है। इससे हजारों चालक लाभान्वित होंगे। आपात सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहेंगी। राज्य में लाखों लोग इससे फायदा उठाते हैं।

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