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SIR Update: SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश "आधार को मान्य दस्तावेज मानें, राजनीतिक दल नाम जुड़वाने में मदद करें"

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, SIR में आधार मान्य, 65 लाख नाम हटे, दल मदद करें

SIR Update: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। कोर्ट ने चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आयोग आधार कार्ड को वैध दस्तावेज माने और राजनीतिक दल लोगों के नाम जुड़वाने में मदद करें। यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महत्वपूर्ण है, जहां 65 लाख नाम हटाने का विवाद है। कपिल सिब्बल ने RJD की ओर से दलील दी, जबकि अभिषेक मनु सिंघवी ने अन्य दलों का पक्ष रखा। कोर्ट ने सभी दलों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

जानें कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने चुनाव आयोग से पूछा कि 12 पंजीकृत राजनीतिक दलों में से कितने कोर्ट आए हैं। आयोग ने कहा कोई नहीं आया, जबकि इनके 1.61 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की, “ऐसा लगता है कि मतदाता राजनीतिक दलों से ज्यादा जागरूक हैं।” कोर्ट ने कहा कि अगर दल ज्यादा जिम्मेदार होते, तो हालात बेहतर होते। आयोग ने बताया कि 65 लाख नाम हटाए गए, जिनमें 22 लाख मृत और 8 लाख डुप्लिकेट थे। 2.63 लाख नए आवेदन आए हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आधार को वैध माने और अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत न हो।

SIR Update: कपिल सिब्बल की दलील

कपिल सिब्बल ने कहा, “बीजेपी क्यों आएगी?” उन्होंने मांग की कि आयोग 65 लाख हटाए गए नामों की सूची प्रकाशित करे। आयोग ने कहा कि लोग ऑनलाइन या ऑफलाइन दावा दर्ज कर सकते हैं, बिहार आने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने 14 अगस्त को आयोग को हलफनामा दायर करने और सूची प्रकाशित करने का आदेश दिया था। BJP का रुख साफ नहीं हुआ, लेकिन कोर्ट ने सभी दलों को 65 लाख नामों की सूची ERO को देने का निर्देश दिया।

SIR Update: क्या होगा चुनाव पर असर?

यह मामला बिहार विधानसभा चुनाव पर असर डाल सकता है। RJD और कांग्रेस नाम हटाने को ‘वोटबंदी’ बता रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल हल्ला मचाने की बजाय मदद करें। लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह फैसला लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा।

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