पटना | बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary द्वारा AI Summit के मंच से दिए गए “हरे गमछे” वाले बयान को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री का बयान केवल AI तकनीक की कार्यप्रणाली समझाने के संदर्भ में था।
दरअसल, पटना में आयोजित AI Summit कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी AI आधारित CCTV निगरानी प्रणाली और फेस रिकॉग्निशन तकनीक की क्षमता समझा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि AI सिस्टम को निर्देश दिया जाए कि “हरे गमछे वालों को खोजो”, तो तकनीक तुरंत ऐसे लोगों की पहचान कर सकती है।

हालांकि, बयान के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी धर्म, समुदाय, जाति या राजनीतिक समूह को निशाना बनाना नहीं था। उन्होंने कहा कि यह केवल AI तकनीक की पहचान क्षमता को समझाने के लिए दिया गया एक सामान्य उदाहरण था।
रोहिणी आचार्य का तीखा हमला
RJD नेता Rohini Acharya ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि “हरे गमछे” का जिक्र कर राजनीतिक विरोधियों और एक खास वर्ग को टारगेट करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीक और AI जैसे गंभीर मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए नहीं होना चाहिए। अपने पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने सम्राट चौधरी पर फर्जी डिग्री, फर्जी उम्र प्रमाण पत्र और पुराने मामलों से जुड़े आरोप भी लगाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की गई है।
पप्पू यादव ने भी जताई आपत्ति
पूर्णिया सांसद Pappu Yadav ने भी इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हरा रंग हरियाली, भाईचारे और साथ रहने का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा कि रंगों के आधार पर राजनीति करना समाज के लिए उचित संदेश नहीं देता। पप्पू यादव ने तंज भरे अंदाज़ में कहा कि “क्या अब पूरे देश की हरियाली पर भी सवाल उठाया जाएगा?”
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री का बयान केवल AI तकनीक की क्षमता समझाने के लिए था, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक संकेत और विरोधियों को डराने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है।




