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AEDO परीक्षा में बड़ा खेल! पेपर लीक की साजिश का खुलासा, ब्लैकलिस्टेड कंपनी से कराया एग्जाम

पटना: बिहार की AEDO (Assistant Engineering Development Officer)
परीक्षा अब बड़े घोटाले की शक के घेरे में आ गई है। शुरुआती जांच और रिपोर्ट्स में जो बातें सामने आ रही हैं, वो चौंकाने वाली हैं। आरोप है कि पूरी परीक्षा एक सुनियोजित साजिश के तहत कराई गई, जिसमें सिस्टम की कई कमजोरियों का फायदा उठाया गया।
कैसे रची गई साजिश? 5 पॉइंट में पूरा खेल समझिए

ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सौंपा गया जिम्मा
सबसे बड़ा सवाल यहीं से उठता है—जिस कंपनी पर पहले ही सवाल उठ चुके थे, उसे फिर से परीक्षा कराने का ठेका कैसे मिल गया? यही फैसला पूरे मामले की जड़ माना जा रहा है।

सेंटर पर ‘सेटिंग’—अपने लोगों की तैनाती
कई परीक्षा केंद्रों पर संदिग्ध कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि इन्हीं के जरिए अंदरखाने पूरी सेटिंग की गई, जिससे पेपर लीक और नकल आसान हो सके।

बायोमेट्रिक जांच फेल—फिंगर-रेटिना चेक नहीं
जहां सख्ती होनी चाहिए थी, वहीं सबसे बड़ी ढील दी गई। कई केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और रेटिना जांच या तो सही से नहीं हुई या बिल्कुल ही नजरअंदाज कर दी गई। इससे फर्जी अभ्यर्थियों के बैठने का रास्ता खुल गया।

CCTV और टेक्नोलॉजी सिर्फ दिखावा बनी
परीक्षा में निगरानी के लिए CCTV और डिजिटल सिस्टम लगाए गए थे, लेकिन उनका प्रभावी उपयोग नहीं हुआ। इससे पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

BPSC की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल BPSC की भूमिका को लेकर है। क्या आयोग ने जानबूझकर लापरवाही की या सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया? अभ्यर्थी अब परीक्षा रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

छात्रों में गुस्सा, कार्रवाई की मांग तेज
परीक्षा देने वाले हजारों अभ्यर्थियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर गड़बड़ी साबित होती है तो परीक्षा तुरंत रद्द कर दोबारा कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

क्या होगा आगे?
सरकार और आयोग दोनों पर दबाव बढ़ चुका है। संभावना है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और कई बड़े नाम सामने आएं। अगर आरोप सही पाए गए, तो यह बिहार के हाल के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में शामिल हो सकता है।

निष्कर्ष: सिस्टम पर बड़ा सवाल
AEDO परीक्षा का यह मामला सिर्फ एक एग्जाम तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भर्ती सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदारों पर कब और कैसी कार्रवाई होती है।

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