
पटना। बिहार में परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने की तैयारी चल रही है। राज्य में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ऊर्जा के नए विकल्प तलाश रही है। इसी कड़ी में परमाणु बिजली घर लगाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इस परियोजना से भविष्य में राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
बिहार में नए उद्योग लगने, शहरों के विस्तार और घरों में बिजली की खपत बढ़ने से आने वाले समय में बिजली की मांग और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में परमाणु ऊर्जा को बिजली उत्पादन के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
बांका और सीवान में संभावित स्थलों पर चल रहा काम
परमाणु बिजली परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जमीन, पानी और तकनीकी उपयुक्तता की जांच महत्वपूर्ण है। जानकारी के मुताबिक, बांका जिले के भिटिया और शंभूगंज तथा सीवान जिले के दरौली में संभावित स्थलों पर काम आगे बढ़ रहा था। वहीं, नवादा के रजौली स्थल को सक्रिय भूगर्भीय भ्रंश रेखा से जुड़ी तकनीकी चिंताओं के कारण इस सूची से हटा दिया गया था। रिपोर्ट में भिटिया को प्रमुख संभावित स्थल बताया गया था।
केंद्र की मदद से आगे बढ़ेगी परमाणु बिजली परियोजना
बिहार में परमाणु बिजली उत्पादन की पहल को केंद्र सरकार के समर्थन से गति मिलने की उम्मीद है। जून 2025 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिहार में परमाणु बिजली संयंत्र लगाने में केंद्र की सहायता की बात कही थी। इसके साथ ही देश में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया था। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर पारंपरिक बड़े परमाणु रिएक्टरों की तुलना में कम क्षमता वाली इकाइयां होती हैं। हालांकि, बिहार में किस तकनीक और कितनी उत्पादन क्षमता वाली परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलेगी, यह आधिकारिक स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगा।
परियोजना की निगरानी के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति
बिहार सरकार भी इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर कदम उठा रही है। राज्य के ऊर्जा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 2 जुलाई 2026 की अधिसूचना में परमाणु बिजली परियोजनाओं की नियमित समीक्षा, निगरानी और विभागों के बीच समन्वय के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की जानकारी दी गई है।
जमीन और पानी की उपलब्धता सबसे अहम
परमाणु बिजली संयंत्र लगाने के लिए पर्याप्त जमीन, पानी और सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होता है। बिहार में ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए जमीन और जल संसाधनों की उपलब्धता पर चर्चा हुई। औरंगाबाद में 110 एकड़ जमीन की उपलब्धता पर भी विचार किया गया है।
बिहार को क्या होंगे फायदे?
परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन शुरू होने पर राज्य को लंबे समय तक बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे उद्योगों, कारोबार और घरेलू उपभोक्ताओं की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा के विकल्प बढ़ेंगे। परमाणु ऊर्जा उत्पादन के दौरान बिजली बनाने के स्तर पर कार्बन उत्सर्जन भी अपेक्षाकृत कम होता है।



