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बिहार में 7 हजार जगहों पर खनिजों की तलाश, 3D मैपिंग से खुलेगा जमीन के नीचे छिपे खजाने का राज

आधुनिक तकनीक से खनिज भंडार की गहराई, आकार और गुणवत्ता का पता लगाने की तैयारी है, ताकि नए खनन क्षेत्रों की पहचान कर राज्य की आमदनी और रोजगार बढ़ाया जा सके।

पटना। बिहार में जमीन के नीचे छिपे खनिज संसाधनों की पहचान के लिए बड़े स्तर पर सर्वे की तैयारी की जा रही है। करीब 7 हजार संभावित जगहों पर खनिजों की तलाश और 3D मैपिंग के जरिए यह पता लगाने पर जोर है कि कहां कौन-सा खनिज मौजूद है और उसका भंडार कितना बड़ा हो सकता है। इस काम में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मदद ली जाएगी। इससे खनिजों की सही स्थिति समझने और आगे खनन की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। राज्य में पहले से ही कई जिलों में महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार मिलने की जानकारी सामने आ चुकी है। ऐसे में नई तकनीक से खोज का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।

3D मैपिंग से कैसे होगी खनिजों की पहचान?

3D मैपिंग के जरिए जमीन के नीचे की बनावट का त्रिआयामी नक्शा तैयार किया जा सकता है। इससे चट्टानों की परतों, खनिजों की संभावित मौजूदगी और उनके फैलाव को समझने में मदद मिलती है। इसके लिए भूवैज्ञानिक सर्वे, ड्रिलिंग और आधुनिक जांच तकनीकों से जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, केवल 3D नक्शे से खनिज भंडार की अंतिम पुष्टि नहीं होती। इसके लिए जमीन से नमूने लेकर जांच और विस्तृत भूवैज्ञानिक अध्ययन करना जरूरी है।

बिहार के इन जिलों में मिले हैं खनिजों के संकेत

बिहार के रोहतास, गया, जमुई, बांका, औरंगाबाद, जहानाबाद और भागलपुर समेत कई जिलों में अलग-अलग खनिजों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें चूना पत्थर, ग्लूकोनाइट, मैग्नेटाइट, निकेल, क्रोमियम, तांबा, जस्ता और दुर्लभ मृदा तत्व शामिल हैं। केंद्र सरकार के खान मंत्रालय के आंकड़ों में भी बिहार के कई क्षेत्रों में खनिजों के अन्वेषण का उल्लेख है। इन संसाधनों की गुणवत्ता और मात्रा की विस्तृत जांच से भविष्य में खनन की संभावनाओं का बेहतर आकलन किया जा सकता है।

खनन से बढ़ सकती है कमाई और रोजगार

अगर सर्वे के बाद व्यावसायिक रूप से उपयोगी खनिज भंडार की पुष्टि होती है, तो राज्य को रॉयल्टी और अन्य मदों से आमदनी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। खनन से जुड़े उद्योग विकसित होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं। हालांकि, खनिज मिलने के बाद भी खनन शुरू करने के लिए विस्तृत जांच, ब्लॉक की नीलामी, पर्यावरणीय मंजूरी और दूसरी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

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