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हर जिले में बनेगा ‘मॉडल सहकार ग्राम’, किसानों को गांव में ही मिलेंगी जरूरी सुविधाएं

नाबार्ड के सहयोग से तैयार होने वाले इन गांवों में सहकारी बैंक, कृषि यंत्र बैंक, खाद-बीज, भंडारण और कौशल विकास जैसी सुविधाओं को एक जगह उपलब्ध कराने की योजना है।

पटना। बिहार सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को गांवों की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सहकारिता नीति-2026 के तहत राज्य के हर जिले में एक ‘मॉडल सहकार ग्राम’ विकसित करने की योजना है। इसके लिए नाबार्ड के सहयोग से रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इन गांवों को इस तरह विकसित किया जा रहा है जिससे किसानों और ग्रामीणों को कृषि तथा कारोबार से जुड़ी कई जरूरी सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

एक गांव में मिलेंगी कई सुविधाएं

मॉडल सहकार ग्राम में कोऑपरेटिव बैंक की शाखा खोलने की योजना है। इसके जरिए किसानों और ग्रामीणों को अपेक्षाकृत आसान दरों पर ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। इसके अलावा कृषि यंत्र बैंक बनाया जाएगा, जहां किसान कम लागत पर खेती के लिए जरूरी मशीन और उपकरण किराये पर ले सकेंगे। खाद और बीज भी निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे किसानों को खेती के मौसम में जरूरी इनपुट के लिए अलग-अलग जगहों पर जाने की जरूरत कम हो सकती है।

भंडारण से लेकर प्रोसेसिंग तक पर जोर

मॉडल सहकार ग्राम में किसानों के लिए अनाज भंडारण की सुविधा विकसित करने की भी योजना है। इसका उद्देश्य फसल कटाई के बाद किसानों को तुरंत कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी से राहत देना है। नाबार्ड भी ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक भंडारण ढांचे और सहकारी समितियों के गोदामों को मजबूत करने के लिए सहायता देता है।

बिहार में सहकारी क्षेत्र के जरिए भंडारण क्षमता बढ़ाने पर पहले से काम चल रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार राज्य में 36 PACS को अनाज भंडारण योजना के तहत चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल प्रस्तावित भंडारण क्षमता 1.045 लाख टन है।

खेती के साथ रोजगार पर भी फोकस

मॉडल गांवों में केवल कृषि सुविधाओं तक सीमित रहने के बजाय डेयरी, मत्स्य पालन, लघु उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। इससे गांव में ही रोजगार और स्थानीय कारोबार के अवसर तैयार करने की कोशिश होगी।

युवाओं और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण

युवाओं और महिलाओं के लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित करने की भी योजना है। महिला-केंद्रित सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने तथा ग्रामीण युवाओं को सहकारिता से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। सहकारिता विभाग ने राज्य में सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाने और निष्क्रिय सदस्यों को दोबारा सक्रिय करने का लक्ष्य भी रखा है।

बिहार में पहले से मौजूद है सहकारी ढांचा

केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 8,463 PACS हैं। इनमें 7,617 समितियां दो या उससे अधिक सेवाओं और 6,234 समितियां तीन या उससे अधिक सेवाओं से जुड़ी हैं। कई PACS खाद वितरण, कॉमन सर्विस सेंटर, कस्टम हायरिंग सेंटर और अन्य ग्रामीण सेवाएं भी दे रही हैं।

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