
पटना: बिहार में बच्चों को कुपोषण से बचाने और महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से पूरक पोषाहार योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए से जरूरतमंद बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को अतिरिक्त पोषण दिया जाता है। योजना का उद्देश्य यह है कि किसी भी बच्चे या मां को पोषण की कमी का सामना न करना पड़े। ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़कर इस योजना का लाभ लेते हैं। छोटे बच्चों की उम्र के हिसाब से उन्हें पूरक आहार दिया जाता है। वहीं गर्भवती और धात्री महिलाओं को भी उनकी जरूरत के अनुसार पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है।
आंगनबाड़ी केंद्र से मिलता है पोषाहार
पूरक पोषाहार योजना की सबसे अहम कड़ी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। अपने इलाके के आंगनबाड़ी केंद्र पर जाकर परिवार योजना से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं। आंगनबाड़ी सेविका लाभार्थियों की जानकारी दर्ज करने और पोषाहार वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। योजना के तहत मिलने वाला पोषाहार सामान्य भोजन का विकल्प नहीं है, बल्कि शरीर की अतिरिक्त पोषण संबंधी जरूरत को पूरा करने के लिए दिया पूरक पोषाहार योजना में मुख्य रूप से छोटे बच्चों को शामिल किया जाता है।
योजना से क्या है फायदा?
बच्चों के शुरुआती वर्षों में सही पोषण उनके विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। पूरक पोषाहार के जरिए बच्चों को अतिरिक्त पोषण देने की कोशिश की जाती है। इससे कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।वहीं गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं को भी पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। योजना के जरिए से इस जरूरत को पूरा करने की दिशा में सहायता दी जाती है।


