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सरकारी स्कूल में AI की एंट्री: Google देगा गुरुजी को ट्रेनिंग, डिजिटल तकनीक से होगी पढ़ाई 

अब सिर्फ बच्चे नहीं, गुरुजी भी सीखेंगे AI; Blackboard से AI Board की ओर बढ़ेगी बिहार की शिक्षा

पटना: बिहार की शिक्षा व्यवस्था में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की एंट्री होने जा रही है। अब तक ChatGPT, Gemini और दूसरे AI टूल्स की चर्चा करने वाले बच्चे ही नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी इन तकनीकों को समझेंगे और पढ़ाई में इनके इस्तेमाल का तरीका सीखेंगे। बिहार शिक्षा विभाग और Google India के बीच शिक्षक दिवस के अवसर पर समझौते की तैयारी की जा रही है। इस पहल का  उद्देश्य सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को AI और आधुनिक डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देना है।

AI से लेसन प्लान से लेकर क्विज तक तैयार करने की ट्रेनिंग

इस पहल के तहत शिक्षकों को यह समझाने पर जोर रहेगा कि AI का इस्तेमाल पढ़ाई को आसान और प्रभावी बनाने के लिए किस तरह किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर शिक्षक AI की मदद से बच्चों के स्तर के अनुसार लेसन प्लान, उदाहरण, क्विज, वर्कशीट और अध्ययन सामग्री तैयार कर सकते हैं। किसी कठिन विषय को बच्चों की समझ के मुताबिक आसान भाषा में समझाने, अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों के लिए अभ्यास सामग्री बनाने और फीडबैक तैयार करने जैसे कामों में भी AI उपयोगी हो सकता है।

Google के साथ AI ट्रेनिंग पर बढ़ी बातचीत

Google for Education की ओर से देशभर में शिक्षकों के लिए AI से जुड़ी ट्रेनिंग पहल चलाई जा रही है। इसमें शिक्षकों को Gemini जैसे AI टूल्स के माध्यम से शिक्षण, मूल्यांकन, फीडबैक और रोजमर्रा के शैक्षणिक कार्यों को आसान बनाने के तरीकों से परिचित कराया जा रहा है।

बिहार में भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी है। Google for Education के प्रतिनिधियों की बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से मुलाकात के दौरान शिक्षकों की AI ट्रेनिंग के साथ-साथ AI लैब और आधुनिक डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।

स्कूलों में AI लैब और Chromebook पर भी विचार

सिर्फ शिक्षकों की ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि चुनिंदा स्कूलों या शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को AI और नई डिजिटल तकनीक से परिचित कराने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा Chromebook जैसे डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई है। हालांकि, इस पूरी पहल की विस्तृत रूपरेखा, कितने शिक्षकों को पहले चरण में प्रशिक्षण दिया जाएगा, ट्रेनिंग ऑनलाइन होगी या ऑफलाइन और किन स्कूलों को इसमें शामिल किया जाएग। फिलहाल समझौते और आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी।

AI शिक्षक की जगह नहीं, शिक्षक की मदद करेगा

AI को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि इसका उद्देश्य शिक्षक की भूमिका खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें और सक्षम बनाना है। तकनीक पढ़ाने की प्रक्रिया को आसान बना सकती है, लेकिन शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद, समझ और मानवीय संबंध की जगह कोई AI नहीं ले सकता।

इसलिए बिहार में इस पहल की असली सफलता MoU पर हस्ताक्षर से नहीं, बल्कि तब मानी जाएगी जब किसी गांव के सरकारी स्कूल में शिक्षक AI की मदद से अपने बच्चों के लिए बेहतर सामग्री तैयार कर पाए और उसका सीधा फायदा विद्यार्थियों की पढ़ाई में दिखाई दे।

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