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Bihar Politics: ओवैसी फैक्टर से RJD की टेंशन बढ़ी, पांचवीं सीट पर फंसा पेंच, लालू ने बुलाई अहम बैठक

बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर हलचल तेज, NDA 4 सीटों पर मजबूत, 5वीं पर महागठबंधन-AIMIM टक्कर

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। बिहार से रिक्त हो रही पांच राज्यसभा सीटों में से चार पर एनडीए का कब्जा लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन पांचवीं सीट पर मुकाबला रोचक बन गया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के रुख ने राजद (आरजेडी) और महागठबंधन के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने रविवार को पटना में संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जहां पांचवीं सीट पर प्रत्याशी उतारने या नहीं उतारने का फैसला होगा। यह बैठक राबड़ी देवी के आवास पर शाम को होगी, जिसमें सभी सांसद, विधायक, विधान पार्षद और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन 5 मार्च को और मतदान 18 मार्च को प्रस्तावित है। चुनाव आयोग ने पहले ही तारीखें घोषित कर दी हैं। बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं, जहां एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का पहली प्राथमिकता का समर्थन जरूरी है।

राज्यसभा की पांच सीटों का गणित: एनडीए मजबूत, महागठबंधन संघर्ष में

बिहार से खाली हो रही पांच सीटों में तीन एनडीए (दो जेडीयू और एक आरएलएसपी/बीजेपी) और दो आरजेडी की हैं। एनडीए के पास विधानसभा में 202 विधायक हैं, जो चार सीटों के लिए पर्याप्त से ज्यादा है। एनडीए को पांचवीं सीट के लिए सिर्फ तीन अतिरिक्त वोट चाहिए, जबकि महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं (आरजेडी 25, कांग्रेस 6, वाम दल 3, इंडियन इंक्लूसिव पार्टी 1)।

महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए छह अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। यहां एआईएमआईएम के पांच विधायक और बसपा का एक विधायक निर्णायक भूमिका में हैं। अगर ये सभी महागठबंधन के साथ आ जाते हैं, तो ठीक 41 वोट बन जाते हैं। लेकिन एआईएमआईएम ने अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है और महागठबंधन से समर्थन मांगा है। प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने तेजस्वी यादव से मुलाकात कर यह मांग रखी थी, लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बनी।

एआईएमआईएम के पांच विधायक सीमांचल क्षेत्र से हैं – अख्तरूल ईमान (अमौर), मोहम्मद मुर्शिद आलम (जोकीहाट), मोहम्मद तौसीफ आलम (बहादुरगंज), मोहम्मद सरवर आलम (कोचाधामन) और गुलाम सरवर (बैसी)। ये सभी मुस्लिम बहुल इलाकों से चुने गए हैं और ओवैसी की पार्टी की विचारधारा पर मजबूती से खड़े हैं। अगर एआईएमआईएम अपना उम्मीदवार उतारती है, तो वोट बंट सकते हैं और महागठबंधन की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं।

लालू की बैठक में क्या होगा फैसला?

रविवार की बैठक में संसदीय बोर्ड पांचवीं सीट पर रणनीति तय करेगा। चर्चा होगी कि प्रत्याशी दिया जाए या एनडीए को वॉकओवर दिया जाए। अगर प्रत्याशी उतारा जाता है, तो अनुभवी और आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति को चुना जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, दो बड़े कारोबारी नाम चर्चा में हैं, जिनमें से एक मुस्लिम समाज से है। इन नामों पर विचार-विमर्श होगा ताकि चुनौतियों से निपटा जा सके।

तेजस्वी यादव के राज्यसभा जाने की भी अफवाहें हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि वे विधायकी छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं। हालांकि, आरजेडी से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बैठक में इस पर भी चर्चा संभव है। लालू प्रसाद की अध्यक्षता में यह बैठक महागठबंधन की एकता और रणनीति को मजबूत करने का मौका होगी।

ओवैसी का दांव और राजनीतिक प्रभाव

असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम बिहार में मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी ने पहले महागठबंधन में शामिल होने की मांग की थी, लेकिन आरजेडी ने इसे ठुकरा दिया। अब एआईएमआईएम अपना प्रत्याशी उतारकर विपक्षी वोटों को बांटने की स्थिति में है। यह रणनीति 2025 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद और मजबूत हुई है, जहां एआईएमआईएम ने पांच सीटें जीतीं।

एनडीए की तरफ से चार सीटें आसानी से जीतने की उम्मीद है। जेडीयू रामनाथ ठाकुर को दोबारा भेज सकता है, जबकि बीजेपी और अन्य सहयोगी अपने उम्मीदवार तय कर रहे हैं। पांचवीं सीट पर अगर मुकाबला हुआ, तो प्राथमिकता के बाद द्वितीय और तृतीय वरीयता के वोट महत्वपूर्ण होंगे।

महागठबंधन की चुनौतियां और संभावनाएं

महागठबंधन के लिए यह समय परीक्षा का है। अगर एआईएमआईएम और बसपा का समर्थन मिल जाता है, तो पांचवीं सीट संभव है। लेकिन ओवैसी के स्वतंत्र रुख से वोट बंटने का खतरा है। कांग्रेस अभी चुप है, जबकि वाम दल और अन्य छोटे दल महागठबंधन के साथ हैं। तेजस्वी यादव पहले ही महागठबंधन से प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर चुके हैं।

यह चुनाव बिहार की सियासत में नए समीकरण बना सकता है। एनडीए का लक्ष्य 5-0 का क्लीन स्वीप है, जबकि महागठबंधन अपनी दोनों सीटें बचाने की जद्दोजहद में है। लालू की बैठक के फैसले से स्थिति स्पष्ट होगी।

राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि ओवैसी फैक्टर ने खेल बदल दिया है। अब देखना होगा कि लालू-तेजस्वी की रणनीति क्या होती है और क्या महागठबंधन अतिरिक्त वोट जुटा पाता है।

Bihar Politics: प्रमुख जानकारी एक नज़र में

विवरण संख्या / विवरण
कुल रिक्त सीटें 05
मतदान की तिथि 18 मार्च 2026
जीत के लिए आवश्यक वोट 41 विधायक
NDA विधायकों की संख्या 202
महागठबंधन विधायकों की संख्या 35
निर्णायक दल AIMIM (05 विधायक), BSP (01 विधायक)

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