Bihar News: प्रशांत किशोर को झटका, जन सुराज के दिग्गज शंकर स्वरूप राम की कांग्रेस में 'घर वापसी', गया की राजनीति में बड़ा उलटफेर
जन सुराज के वरिष्ठ नेता शंकर स्वरूप राम ने कांग्रेस जॉइन की। पटना सदाकत आश्रम में सदस्यता ग्रहण, इसे 'घर वापसी' कहा, राजेश राम की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम।
Bihar News: बिहार की सियासत में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को तगड़ा झटका लगा है, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता शंकर स्वरूप राम ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। पटना के सदाकत आश्रम स्थित बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम की मौजूदगी में शंकर स्वरूप राम ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने इसे अपनी ‘घर वापसी’ करार देते हुए कहा कि उनकी विचारधारा हमेशा से कांग्रेस के मूल्यों के करीब रही है और अब वे पूरी निष्ठा से पार्टी के लिए काम करेंगे।
सदाकत आश्रम में हुआ ऐतिहासिक कार्यक्रम
कार्यक्रम में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने शंकर स्वरूप राम का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शंकर स्वरूप राम जैसे अनुभवी नेता के शामिल होने से पार्टी संगठन को नई ताकत मिलेगी। उनके सामाजिक और राजनीतिक अनुभव का लाभ न केवल कांग्रेस को बल्कि बिहार की जनता को भी मिलेगा। राजेश राम ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और गरीबों के हितों की पक्षधर रही है, और ऐसे नेताओं की वापसी से पार्टी की जड़ें और मजबूत होंगी।
शंकर स्वरूप राम पूर्व सांसद स्वर्गीय रामस्वरूप राम के पुत्र हैं, जो गया से दो बार लोकसभा सदस्य चुने गए थे। वे गया जिले के मखदुमपुर (एससी) विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हैं और लंबे समय से सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने जन सुराज पार्टी के टिकट पर मखदुमपुर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन अब वे अपनी मूल विचारधारा की ओर लौट आए हैं। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे, जिन्होंने नए सदस्यों का जोरदार स्वागत किया।
जन सुराज पार्टी पर बढ़ता दबाव
यह घटना जन सुराज पार्टी के लिए लगातार आ रहे झटकों की श्रृंखला में नवीनतम है। प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित जन सुराज ने बिहार में नई राजनीति का दावा किया था, लेकिन चुनावी नतीजों के बाद पार्टी में असंतोष और नेताओं के जाने की खबरें सामने आ रही हैं। शंकर स्वरूप राम जैसे प्रभावशाली नेता का जाना पार्टी की मजबूती पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस को गया और जहांनाबाद जैसे क्षेत्रों में मजबूत आधार देने में मदद कर सकता है, जहां राम परिवार का पारंपरिक प्रभाव रहा है।
शंकर स्वरूप राम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं हमेशा से कांग्रेस का रहा हूं। मेरी सोच और परिवार की विरासत कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ी हुई है। जन सुराज में रहकर मैंने प्रयास किया, लेकिन अब मुझे लगता है कि कांग्रेस ही वह मंच है जहां मैं जनता की सेवा बेहतर तरीके से कर सकता हूं।” उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि वे संगठन को मजबूत बनाने और आगामी चुनौतियों का सामना करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
संगठन विस्तार और मजबूती
बिहार कांग्रेस लंबे समय से संगठनात्मक स्तर पर मजबूती की कोशिश कर रही है। हाल के महीनों में कई स्तरों पर नए चेहरों और अनुभवी नेताओं को जोड़ने का अभियान चल रहा है। राजेश राम के नेतृत्व में पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाई है और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर फोकस किया है। शंकर स्वरूप राम की ‘घर वापसी’ को पार्टी के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कांग्रेस महागठबंधन के साथ मिलकर मजबूत विपक्षी भूमिका निभाने की तैयारी में है। नेता के शामिल होने से गया जिले में पार्टी की स्थिति मजबूत हो सकती है, जहां दलित और पिछड़े वर्गों का बड़ा वोट बैंक है।
Bihar News: राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि जन सुराज जैसी नई पार्टियों को अक्सर ऐसे झटके लगते हैं जब उनके नेता मूल दलों की ओर लौटते हैं। प्रशांत किशोर की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन पार्टी के प्रवक्ताओं ने इसे व्यक्तिगत फैसला बताते हुए कहा कि जन सुराज का सफर जारी रहेगा। दूसरी ओर, कांग्रेस इसे अपनी बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण मान रही है।
शंकर स्वरूप राम की यह कदम बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इससे कांग्रेस को कितना फायदा होता है और जन सुराज कैसे इस चुनौती का सामना करती है। फिलहाल, सदाकत आश्रम में हुई यह ‘घर वापसी’ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहजनक संदेश लेकर आई है।



