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बिहार में डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार, सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को दिए बड़े निर्देश

पटना | बिहार सरकार अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए डेयरी, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र पर बड़ा फोकस कर रही है। इसी दिशा में बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने लोक सेवक आवास में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य में दूध और मछली उत्पादन बढ़ाने, पशुपालकों की आय में सुधार लाने और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार करने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

 

बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के पशुपालकों को कॉम्फेड के माध्यम से उन्नत नस्ल की गाय, भैंस और बकरी उपलब्ध कराई जाए। सरकार का मानना है कि बेहतर नस्ल और आधुनिक तकनीक के उपयोग से दूध उत्पादन में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। इससे किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

 

महिला पशुपालकों को प्राथमिकता देने पर जोर

बैठक में महिला सशक्तिकरण को भी विशेष महत्व दिया गया। सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार की योजनाओं में महिला पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। पशुपालन और डेयरी सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।

 

सरकार का लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आमदनी में स्थायी सुधार लाना भी है। इसी वजह से विभाग को महिलाओं तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 

बिहार की मछलियां अब सीमावर्ती बाजारों तक पहुंचेंगी

मत्स्य क्षेत्र को लेकर भी बैठक में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिहार के मछली उत्पादकों की पहुंच नेपाल और सीमावर्ती राज्यों के बाजारों तक सुनिश्चित की जाए। सरकार का मानना है कि अगर मछली उत्पादकों को बड़ा बाजार मिलेगा तो उनकी आय में तेजी से वृद्धि होगी।

 

इसके साथ ही मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया। बिहार पहले से ही मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार इसे बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने की तैयारी में है।

सरकार ने तय किए महत्वाकांक्षी लक्ष्य

बैठक में डेयरी और मत्स्य उत्पादन को लेकर बड़े लक्ष्य भी तय किए गए—

  • दूध उत्पादन

वर्तमान में सूधा के माध्यम से करीब 40 लाख लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन हो रहा है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 1 करोड़ 25 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का है।

  • मत्स्य उत्पादन

फिलहाल बिहार में करीब 9 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष मत्स्य उत्पादन हो रहा है।इसे बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये लक्ष्य पूरे होते हैं तो बिहार देश के प्रमुख डेयरी और मत्स्य उत्पादक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की तैयारी

बैठक के अंत में सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर तक पहुंचाना है ताकि ग्रामीण युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

 

सरकार का फोकस आने वाले समय में डेयरी, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र को बिहार की आर्थिक ताकत के रूप में विकसित करने पर है। इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा, पलायन कम होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

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